शिमला –सर्दियों में ठंड दूर भगाने वाले केरोसिन हीटर की जगह अब एचपीयू में दूसरा विकल्प जल्द आ सकता है। केरोसिन हीटर पर लाखों का बिल आने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन दूसरा साधन ढूंढ रहा है। हालांकि जब तक दूसरा विकल्प एचपीयू के पास नहीं आता है, तब तक कर्मचारियों व छात्रों के लिए केरोसिन तेल उपलब्ध करवा दिया गया है। इस तेल का दुरुपयोग न हो, इसके लिए मॉनीटरिंग कमेटियों का गठन भी कर लिया गया है। अब ये कमेटियां सभी ब्रांच में जाकर देखेंगी कि कहीं बिना कर्मचारियों के ही केरोसीन हीटर तो नहीं चलाए जा रहे हैं। दरअसल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति ने आदेश दिए हैं कि केरो हीटर का इतना बिल न आए, इसको लेकर कोई समाधान निकालें। यही वजह है कि कुलपति के आदेशों के बाद रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी केरो हीटर की जगह दूसरा क्या साधन एचपीयू में इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर मंथन कर रही है। बताया जा रहा है कि केरो हीटर की जगह बिजली के हीटर या फिर ब्लौर जैसी सुविधा सर्दियों में एचपीयू के कर्मचारियों व छात्रों को दी जा सकती है। दरअसल प्रदेश विश्वविद्यालय में तीन महीने में लाखों का खर्चा केरोसीन तेल की वजह से आ रहा है। ऐसे में प्रशासन भी हैरान है कि इतना बजट एचपीयू के अन्य कार्यों में इस्तेमाल में लाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार केरोसिन हीटर को बंद भी किया जा सकता है। इसके लिए विश्वविद्यालय कर्मचारियों व छात्रों के सुझाव भी ले सकता है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में केरोसिन हीटर पर तीन महीने में 40 लाख का खर्चा आ रहा है। केरोसिन तेल का इतना बिल बनने पर विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैरान हो गए थे। यही वजह है कि उन्होंने रजिस्ट्रार को केरोसिन हीटर का इतना खर्चा होने पर रिपोर्ट मांगी है। हालांकि यह रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी गई है। बता दें कि कुलपति ने रजिस्ट्रार से इस बाबत रिपोर्ट बहुत पहले मांग ली थी, लेकिन रजिस्ट्रार ने रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं की है। यही वजह रही कि एक दिन केरोसिन तेल खत्म होने की वजह से कोई भी स्टोव कर्मचारियों का एचपीयू में नहीं चला। गौर हो कि एचपीयू में तीन महीने में 40 लाख का खर्चा केरोसिन हीटर पर आना एक बहुत बड़ी बात है। यही वजह है कि कुलपति ने रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मांगी थी कि कहीं किसी ब्रांच में इसका गलत इस्तेमाल या दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है। हालांकि दो हफ्ते पहले से यह जांच एचपीयू प्रशासन ने रजिस्ट्रार को सौंपी थी, बावजूद इसके कोई भी रिपोर्ट नहीं आई है। एचपीयू प्रशासन की ओर से भी इस बारे में यही तर्क दिया गया कि केरोसिन हीटर बंद करने को लेकर कोई आदेश जारी नहीं हुए थे। केवल इस बारे में रिपोर्ट ही मांगी गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि अब केरो हीटर का दुरुपयोग होने पर ब्रांच ऑफिसर से जवाब तलब किया जाएगा।
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