शिमला, 9 अगस्त 2026: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर की गई सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए शामिल करने से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने एकल पीठ के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें याचिकाकर्ता की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लिए गिनने का निर्देश दिया गया था।
खंडपीठ ने बरकरार रखा एकल पीठ का फैसला
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एकल पीठ के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की पात्र अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े लाभों के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मामला तकनीकी शिक्षा विभाग में कार्यरत हरीश कुमार से जुड़ा है। उन्हें 7 अक्तूबर 2010 को राजकीय फार्मेसी कॉलेज, रोहड़ू में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत स्टूडेंट वेलफेयर फंड के माध्यम से लेक्चरर के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने सहायक प्रोफेसर (फार्मेसी) के रूप में सेवाएं दीं।
राज्य सरकार की नीति के तहत सात वर्ष अथवा 9,600 घंटे की सेवा पूरी करने के बाद उनकी सेवाओं को 22 दिसंबर 2017 से अनुबंध आधार पर लिया गया। इसके बाद तीन वर्ष की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करने पर 28 अप्रैल 2021 को उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया।
अनुबंध अवधि को वरिष्ठता में जोड़ने की मांग
नियमितीकरण के बाद हरीश कुमार ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी मांग थी कि 22 दिसंबर 2017 से 28 अप्रैल 2021 तक की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए उनकी सेवा अवधि में शामिल किया जाए।
याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया था।
सरकार की अपील पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि ताज मोहम्मद मामले से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से दायर एसएलपी सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। इसके चलते संबंधित फैसला अंतिम रूप ले चुका है।
इसी आधार पर खंडपीठ ने माना कि एकल पीठ द्वारा याचिकाकर्ता को उस फैसले का लाभ देने में कोई त्रुटि नहीं हुई। परिणामस्वरूप राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया गया और पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा गया।
कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
हाईकोर्ट का यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिनकी सेवाओं में अनुबंध और नियमित नियुक्ति के अलग-अलग चरण रहे हैं। मामले में अदालत ने संबंधित न्यायिक मिसाल के आधार पर पात्र अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए विचार करने के आदेश को कायम रखा है।
मुख्य बिंदु:
- हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की।
- अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए गिनने का आदेश बरकरार रहा।
- मामला तकनीकी शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर (फार्मेसी) हरीश कुमार से संबंधित है।
- 22 दिसंबर 2017 से 28 अप्रैल 2021 तक की अनुबंध सेवा विवाद का प्रमुख हिस्सा थी।
- ताज मोहम्मद मामले में सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी खारिज होने का भी हाईकोर्ट ने उल्लेख किया।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले से संबंधित कर्मचारी को अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और पदोन्नति के लाभों के लिए शामिल किए जाने का रास्ता साफ हुआ है। अदालत ने एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।





