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Monday, December 16, 2019

तैयार सड़कें फिर बनाने की मंजूरी

कैग रिपोर्ट में 65 गांवों के लिए प्रदेश पीडब्ल्यूडी-योजना विभाग की लापरवाही उजागर

 धर्मशाला –हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2017-18 की भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सरकार और विभागों की कार्यप्रणाली बड़े सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि लोक निर्माण विभाग और योजना विभाग ने 65 प्रोजेक्ट में पहले से ही सड़क सुविधा से जुड़े गांवों को सड़क बनाने की मंजूरी प्रदान कर दी। कैग की रिपोर्ट के अनुसार नाबार्ड के तहत परियोजनाओं की प्राथमिकता हेतु लोक निर्माण विभाग और योजना विभाग ने विधायकों को जानकारी ही उपलब्ध नहीं करवाई। इतना ही नहीं, परियोजनाओं का चयन अड़चनों के आधार के बिना और व्यापक विश्लेषणों के बिना ही कर लिया गया, जिस कारण 2013-18 के दौरान कुल स्वीकृत 106 परियोजनाओं में 65 को पहले से ही सड़कों से जुड़े हुए गांवों को दोबारा मंजूरी प्रदान कर दी गई। इसके अलावा 7.76 करोड़ की लागत से पांच परियोजनाओं को ब्लैक टॉप के प्रावधान के बिना चयन किया गया। वहीं, नौ मंडलों से 10.71 करोड़ की राशि अनियमित रूप से निकाली गई, जिसे 10 से 82 माह तक ऐसे ही रहने दिया गया। ऐसे में ऋण रूप में नाबार्ड की स्वीकृत राशि वर्ष 2013 से 2018 तक 57.73 का कम दावा किया गया। इसके अलावा संविदा अनुबंध में निष्पादन प्रतिभूति का प्रावधान न करने और रॉयलट एवं उपयोगी पत्थरों की वसूली न करके 119 अनुबंधों के ठेकेदारों को 10.94 करोड़ का वित्तीय लाभ प्रदान कर दिया गया है। इसके साथ ही नाबार्ड द्वारा 859.26 करोड़ की स्वीकृत 269 परियोजनाओं में से 393 करोड़ से बनने वाली 132 परियोजनाओं पर एक साल के भीतर कार्य शुरू कर दिया गया। इसके बाद 135.07 करोड़ रुपए का खर्च करने के  चार वर्ष बाद मात्र 65 कार्यों को ही पूरा किया जा सका, जबकि लोक निर्माण विभाग के 17 मंडलों में 414.67 करोड़ की 123 परियोजनाओं का कार्य नौ-नौ वर्ष देरी के बाद ठेकेदारों को प्रदान किया गया, जिसके कारण योजना के तहत कार्य होने में ओर अधिक देरी हुई। वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण रिपोर्ट के तहत 2013-18 के तहत गुणवत्ता नियंत्रण विंग ने 32 औ राज्य गुणवत्ता मॉनिटर ने 102 द्वारा 28 परियोजनाओं में 134 निरीक्षण करने पर भी कमियों को सुधारने को लेकर कोई उचित कार्रवाई न किए जाने की बाता भी सामने आई है।

33 सड़कें अनफिट

कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि नाबार्ड के तहत 49 करोड़ रुपए का बजट खर्च करके सड़कों का निर्माण किया गया, लेकिन इनमें 33 सड़कों को सड़क फिटनेस समिति द्वार वाहन यातायात हेतु पास ही नहीं किया गया, जिससे सड़कों पर किया गया व्यय पूरी तरह से व्यर्थ रहा।

 

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Courtsey: Divya Himachal

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