
शिमला-रेणुका डैम परियोजना की लागत बढ़कर 6946 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। जिस वक्त इस परियोजना का खाका बनाया गया था, उस समय इसकी अनुमानित लागत 3800 करोड़ रुपए के आसपास थी, जो बाद में बढ़कर 4500 करोड़ रुपए तक पहुंची। अब इससे कहीं ज्यादा लागत पहुंच चुकी है, लेकिन अभी भी यह तय नहीं है कि इतनी राशि में परियोजना का निर्माण हो जाएगा। अभी तक केंद्र सरकार से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है। केंद्र सरकार को प्रतिक्रियात्मक दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं, लेकिन उसकी ओर से कोई इशारा नहीं किया गया है। ऐसे में यह मालूम नहीं कि आगे कितने साल लगेंगे और तब तक इसकी निर्माण लागत कहां तक पहुंच जाएगी। रेणुका बांध परियोजना 40 मेगावाट की प्रस्तावित है, जो कि राष्ट्रीय महत्त्व का प्रोजेक्ट है। इस परियोजना से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को पेयजल की आपूर्ति की जानी है। परियोजना में 148 मीटर ऊंचा बांध तथा सतह पर विद्युत गृह का निर्माण, सिरमौर के ददाहू में गिरी नदी पर किया जाएगा। इसके जलाशय में 49800 हेक्टेयर मीटर पानी का संग्रह होगा तथा इसमें से 23 घन मीटर प्रति सेकेंड की दर से दिल्ली को स्थिर आपूर्ति के तौर पर पानी मिलेगा। छोड़े गए पानी से हिमाचल को प्रति वर्ष 199.99 मिलीयन यूनिट्स बिजली मिलेगी। बताया जाता है कि केंद्रीय जल आयोग द्वारा रेणुकाजी बांध परियोजना के संशोधित लागत अनुमान को अक्तूबर, 2018 मूल्य स्तर पर 6946.99 करोड़ रुपए में स्वीकृत किया गया है। इसमें जल आपूर्ति घटक 6647.46 करोड़ एवं विद्युत घटक 299.53 करोड़ है। हालांकि 104.205 करोड़ की लाडा की लागत को इसमें शामिल नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल आयोग से आग्रह किया है कि परियोजना की कुल लागत में स्थानीय क्षेत्र विकास निधि लागत को भी शामिल किया जाए, तब कुल लागत 7051.195 करोड़ हो जाएगी, जिसका लाभ प्रभावित एरिया में भी बढ़ेगा। इस परियोजना में भारत सरकार जल आपूर्ति घटक का 90 फीसदी हिस्सा वहन करेगी तथा शेष दस फीसदी लाभार्थी राज्य वहन करेंगे, ऐसा प्रस्ताव है। लाभार्थी राज्यों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं।
प्रोजेक्ट में अभी और वक्त
विद्युत गृह की निर्माण लागत हिमाचल को वहन करनी है, परंतु दिल्ली सरकार द्वारा विद्युत घटक कार्यों की कीमत का 90 फीसदी हिस्सा वहन करने पर सहमति बन गई है। बहरहाल, लोग लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसमें काफी संख्या में लोग प्रभावित हो चुके हैं। अभी लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ रहा है और इसके बदले में सभी लोगों को पैसा भी नहीं मिला है। प्रोजेक्ट में और समय लगेगा, तो इसकी लागत ज्यादा बढ़ जाएगी। बाद में ऐसा न हो कि प्रोजेक्ट की वायबिलिटी ही खत्म हो जाए।
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Courtsey: Divya Himachal
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