शिमला – एक दिन में अठारह साल तक के बच्चों को कितने घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए, इस बारे में स्कूली छात्रों को जागरूक किया जाएगा। शिक्षा विभाग शिमला के स्कूलों में फरवरी में इस बारे में छात्रों की काउंसिलिंग करेंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने शेड्यूल तैयार कर दिया है। शिमला के 2 से 3 हजार छात्रों को इस बारे में जागरूक किया जाएगा। बता दें कि अडल्ट शिक्षा पर पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है। शिक्षा विभाग व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस पर पूरा सिलेबस तैयार कर लिया है। बताया जा रहा है कि पहले चरण में शिमला के 20 से 30 शिक्षकों को अडल्ट शिक्षा पर ट्रेंड किया जाएगा। शीतकालीन अवकाश के दौरान शिक्षकों को विभाग यह ट्रेनिंग देगा। वहीं, उसके बाद फरवरी माह में जब स्कूल खुलेंगे, तो छात्रों को इस बारे में जानकारी दी जाएगी। बता दें कि राजधानी शिमला के स्कूल कालेजों में पढ़ने वाले छात्र काफी संख्या में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव का शिकार हो रहे हैं। यहां तक कि छात्र मोबाइल में केवल गेम व अन्य मंनोरंजक चीजें करते हैं, बल्कि ऑनलाइन स्टडी की गिरफ्त में भी आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऑनलाइन स्टडी भी छात्रों के दिमाग पर बुरा प्रभाव डाल रही है। ऐसे में स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के अधिकारी पहले अवकाश के बीच शिक्षकों को किशोर अवस्था में मोबाइल के हो रहे बुरे प्रभाव के बारे में बताएंगे, तो वहीं उसके बाद कितने घंटे छात्रों को इसका इस्तेमाल करना चाहिए, इस पर भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। दरअसल किशोरावस्था में बच्चों मे होने वाले परिवर्तन को लेकर शिक्षा विभाग स्कूल के छात्रों को जागरूक करने जा रहा है। यही नहीं मोबाइल और इंटरनेट के प्रयोग को लेकर भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए पहले चरण में प्रदेश के 400 स्कूलों को शामिल किया जाएगा और इन स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, शिमला के 20 से 30 स्कूलों के शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाएगी। यह प्रशिक्षण एससीईआरटी और डाइट केंद्रों पर शिक्षकों को दिया जाएगा, जिसके बाद शिक्षक स्कूलों में छात्रों को इस बारे में जागरूक करेंगे। इस दौरान स्वास्थ्य के प्रति भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा। बता दें कि एसीईआरटी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्कूली छात्रों के लिए एक मॉडयूल तैयार किया गया है, जिसमें किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और बदलावों को लेकर छात्रों को जागरूक करना है। शिक्षा विभाग के अनुसार किशोरावस्था में बच्चों में कई बदलाव आते हैं। वहीं, मोबाइल और इंटरनेट के दौर में बच्चे इससे अछूते नहीं हैं और वे इसका उपयोग भी काफी करते दिखते हैं, लेकिन मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग कितना किया जाना चाहिए और वेबसाइट का प्रयोग करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा ताकि बच्चे इसका सही उपयोग कर सकें। प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डा. प्रमोद चौहान ने बताया कि किशोर शिक्षा को लेकर पहले चरण में 400 स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इसमें इन स्कूलों के शिक्षकों को एससीईआरटी और डाइट केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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