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Monday, December 30, 2019

एडवांस स्टडी की किताबें आनलाइन साइट पर

एक साल के भीतर देश-विदेश के 300 पाठक कर चुके हैं खरीद, नए-नए शोध पहुंच रहे पाठकों तक

शिमला –शिमला स्थित उच्च शिक्षण संस्थान में शोध की गई किताबें अब ऑनलाइन साइट पर शोधार्थियों को मिल रही हैं। खास बात यह है कि पहली बार शिक्षण संस्थान द्वारा की गई इस पहल का फायदा देश व विदेशों में भी किताबों के इच्छुक लोगों को मिल रहा है। उच्च शिक्षण संस्थान के स्टोर में एडवांस स्टडी की किताबों के साथ अब ऑनलाइन खरीद में भी लोगों की काफी रूचि हो रही है। बता दें कि अंग्रेजों के समय में बने इस संस्थान में अभी तक 500 किताबें शोध हो चुकी हैं। अहम यह है कि यह बड़े-बड़े शोधकर्ताओं ने इस संस्थान में रहकर ही इतनी किताबों पर शोध कर लिया है। शिमला का उच्च शिक्षण संस्थान यानी एडवांस स्टडी मानवीकि और सामाजिक विषय पर ही शोध करते हैं। अभी तक किए गए 500 किताबों के शोध में शोधार्थियों ने हिमाचली संस्कृति और समाज में गरीब लोगों की जुड़ी समस्याओं पर भी आंकड़ों के साथ शोध किया है। खास बात यह है कि इन दिनों पर्यटन सीजन में भी एडवांस स्टडी की किताबें खरीदने में पर्यटक काफी रूचि दिखा रहे हैं। गौर हो कि आजादी की लड़ाई के समय इस संस्थान के भवन में कई ऐतिहासिक बैठकें हुईं और फैसले लिए गए। पाकिस्तान के साथ 1945 में हुआ शिमला समझौता इसी भवन में हुआ था। पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान को देश से अलग करने का फैसला यहीं लिया गया। देश को आजादी मिलने के बाद इस भवन को राष्ट्रपति निवास का नाम दिया गया। गर्मियों के दिनों में राष्ट्रपति यहां समय बिताने आते थे। बाद में राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन ने इस भवन को उच्च शिक्षा और शोध संस्थान बनाने का फैसला लिया। इसके कारण राष्ट्रपति निवास को यहां से बदलकर छराबड़ा स्थित रिट्रील के लिए शिफ्ट किया गया। यही वजह है कि उसके बाद से अभी तक इस भवन में देश व विदेशों से शोधकर्ता आते हैं और मानवीकि और सामाजिक मुद्दों से संबंधित शोध करते हैं।

संस्थान में इन विषयों पर होता है शोध

मानविकी, कला और सौंदर्य, तुलनात्मक साहित्य का अध्ययन, धर्म और दर्शन का अध्ययन, सामाजिक विज्ञान, विकास अध्ययन, तुलनात्मक राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन, सामाजिक, आर्थिक और सामाजिक, सांस्कृतिक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में संरचना, प्राकृतिक और जीवन विज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर राज्य नीतियां, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास तकनीक  शामिल है।

देश-विदेश के शोधार्थी कर रहे रिसर्च

इस संस्थान में आज भी विभिन्न राज्यों से दर्जनों शोधकर्ता रिसर्च के लिए पहुंचते हैं। वहीं, मौजूदा समय में भी यहां पर कई प्रसिद्ध शोधकर्ता रिसर्च कर रहे हैं।

एडवांस स्टडी का शानदार इतिहास

बता दें कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज अपनी ऐतिहासिकता के लिए दुनिया भर में विख्यात है। इस संस्थान का इतिहास बेहद गौरवमयी रहा है। जानकारी के अनुसार संस्थान का भवन वर्ष 1884 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन के लिए बनाया गया था। इसे वाइसरीगल लॉज कहा जाता था। इसके बाद 1888 में यहां के लिए बिजली की व्यवस्था की गई। शिमला में शायद यह पहला भवन था, जहां बिजली की व्यवस्था थी।

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