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Sunday, March 24, 2019

कमिश्नर डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी के सामने पेश होंगे डा. ओहरी

शिमला —चंबा मेडिकल कालेज में करोड़ों के घोटाले के आरोपी डा. अनिल ओहरी को कमिश्नर डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ जांच का जिम्मा उक्त एजेंसी को सौंपा है। आरोप है कि डा. अनिल ओहरी ने चंबा मेडिकल कालेज में प्रिंसीपल रहते हुए करीब दो करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं की हैं। इसके चलते सस्पेंशन के बाद राज्य सरकार उन्हें चार्जशीट कर चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व प्रिंसीपल के खिलाफ जांच का मामला कमिश्नर डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी को सौंपा गया है।  चंबा मेडिकल कालेज की स्थापना में एक करोड़ 90 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इस आधार पर मेडिकल कालेज के तत्कालीन प्रिंसीपल डा. अनिल ओहरी को चार्जशीट जारी की गई थी। विभागीय जांच में डा. अनिल ओहरी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आठ अलग-अलग आरोप तय किए गए हैं।  विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ है कि पहली जुलाई, 2016 से तीन जून, 2018 के बीच मैनपावर की आउटसोर्सिंग के लिए जमकर धांधली हुई है। नियमों को दरकिनार करते हुए आउटसोर्सिंग भर्ती में राज्य सरकार को 43 लाख 65 हजार 735 रुपए की क्षति पहुंचाई गई है। इसी तर्ज पर मेडिकल कालेज में मरीजों की देखभाल और तीमारदार के नाम पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। बिना कोडल फोर्मेलिटिज के अस्पताल में मशीनरी व उपकरणों की खरीद की गई है। इस कारण राज्य सरकार को 25 लाख 97 हजार 120 रुपए का नुकसान पहुंचा है। मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए सीसीटीवी कैमरों की खरीद में अनियमितताएं बरती गई हैं। नियमों को दरकिनार कर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से सरकार को 47 लाख 43 हजार 724 रुपए की चपत लगी है। इसी प्रकार मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए किताबों की खरीद में धांधली बरती गई है। इससे सरकार को नौ लाख 67 हजार 690 रुपए की चपत लगी है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2017-18 के एमबीबीएस-बीडीएस  कोर्स के लिए मेडिकल छात्रों से अधिक फीस वसूल की गई है। प्रोस्पेक्ट्स में दर्शाई गई फीस से अधिक राशि वसूलने पर प्रिंसीपल को आरोपी बनाया गया है। विभागीय जांच के अनुसार मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए किराए पर लिए भवनों का किराया निर्धारित मापदंडों से कई गुना अधिक दिया गया है। इसके लिए प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज किया गया है। इस कारण मेडिकल कालेज के लिए हायर किए गए निजी भवनों पर प्रतिमाह छह लाख 97 हजार 492 रुपए लुटाए गए हैं। इससे राज्य सरकार को अप्रैल 2017 से लेकर जुलाई 2018 के बीच कुल 45 लाख 68 हजार 716 रुपए की चपत लगी है। लिहाजा डा. अनिल ओहरी को कंडक्ट रूल्स 1964 के तहत आरोपी मानते हुए राज्य सरकार ने चार्जशीट जारी की है। अब उन्हें 10 दिन के भीतर इन आरोपों का क्रमवार जवाब देना होगा। इसके बाद ही सरकार अगली कार्रवाई तय करेगी। बहरहाल, आरोपी पर जांच का शिकंजा कस गया है।

 

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Courtsey: Divya Himachal
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