1977 में कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट पर लोकदल पार्टी के प्रत्याशी ने पायी थी कामयाबी
धर्मशाला —देश में 1952 में पहली बार लोकसभा चुनाव आयोजित किए गए, कांग्रेस ने शुरुआती दौर से ही इस सीट पर बढ़त बनाए रखी। 1952 से लेकर 1971 तक पंजाब के अंतर्गत कांगड़ा सीट का चुनाव आयोजित किया गया। 1972 में हिमाचल का जन्म पंजाब के विभाजन से हुआ। हिमाचल के गठन के बाद पहली बार कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र का चुनाव 1977 में आयोजित किए गए, जिसमें भारतीय लोकदल पार्टी के प्रत्याशी कंवर दुर्गा चंद ने कांग्रेस का विजय रथ रोककर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना नाम दर्ज कर लिया। इसके बाद वर्ष 1980 में एक बार फिर कांग्रेस ने कांगड़ा संसदीय सीट पर जीत हासिल की। 1984 में कांग्रेस के प्रत्याशी चंद्रेश कुमारी ने जीत दर्ज की। इसके बाद शांता कुमार ने 1989 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में पहली बार जीत हासिल की। 1991 में उपचुनाव में भाजपा के डीडी कन्नोरिया ने भी कांगड़ा से जीत दर्ज की। 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी सत महाजन ने कांगड़ा सीट जीती। शांता कुमार ने 1998 और 1999 में भाजपा को जीत दर्ज करवाई। 2004 में कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र कुमार ने कांगड़ा सीट पर जीत दर्ज करवाई। 2009 में भाजपा से राजन सुशांत और 2014 में शांता कुमार ने जीत दर्ज की। कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने लगातार 2009 से कब्जा जमाया है। 1952 से 2014 तक आयोजित हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस 11 बार कांगड़ा संसदीय क्षेत्र पर राज करने में सफल रही है। इसी तरह भाजपा छह और एक बार भारतीय लोकदल पार्टी सफल रही है। 1977 में लोकदल ने कांग्रेस की जीत पर रोक लगाई, लेकिन 1989 के पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की, जिसके बाद 2014 तक आठ लोकसभा चुनावों में मात्र दो ही जीत दर्ज कर पाई है। कांग्रेस इस बार अपना गढ़ माने जाने वाली कांगड़ा सीट पर कमबैक करने को भी पूरी रणनीति तैयार करने में जुटी हुई है। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने हैट्रिक लगाने के चक्कर में कांगड़ा सीट के लिए अपना प्रत्याशी किशन कपूर के रूप में उतार दिया है। वहीं कांग्रेस पार्टी इस सीट पर कमबैक करना चाहती है, लेकिन अभी तक कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
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Courtsey: Divya Himachal
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