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Wednesday, November 7, 2018

शिक्षाविद को ही सौंपें उच्च् शिक्षा का जिम्मा

सीएम-शिक्षा मंत्री नहीं होंगे स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के चीफ

शिमला – भारत सरकार ने उच्च शिक्षा को लेकर बनाई गई स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को अध्यक्ष बनाने का फैसला नामंजूर किया है। खास बात है कि बेहतर उच्च शिक्षा के लिए प्रदेश के शिक्षाविद द्वारा ही काउंसिल का कार्यान्वयन किया जाएगा। इससे पहले शिक्षा विभाग में स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल का अध्यक्ष मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को बनाने की चर्चा चल रही थी। प्रदेश शिक्षा विभाग ने दोनों मंत्रियों के नाम इस काउंसिल के लिए फाइनल कर भारत सरकार को भी भेज दिए थे, लेकिन भारत सरकार ने शिक्षा विभाग का यह प्रोपोजल रिजेक्ट कर इस काउंसिल में शिक्षा विद को शामिल करने के निर्देश दिए थे। प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के नाम पर मुहर लग पाई है। कैबिनेट में इस काउंसिल को मंजूरी मिलने के बाद अब शिक्षा विभाग ने बिल भी तैयार कर दिया है। बताया जा रहा है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान काउंसिल पर यह विधेयक पारित किया जाएगा। एमएचआरडी की नई गाइडलाइन के तहत इस काउंसिल का हैड कालेज स्तर का शिक्षा विद होगा। वहीं उनकी अध्यक्षता में ही यह काउंसिल कार्य करेगी। रूसा के तहत एमएचआरडी की नई गाउडलाइन लागू करने के लिए ही इतने वर्षों से स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल लागू करने में दिक्कतें आ रही थीं। लंबी प्रक्रिया के बाद जब प्रदेश की उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि अब कालेजों में रूसा के तहत कई विकास कार्य बिना किसी रूकावट के होंगे। जानकारी के अुनसार तीन साल से काउंसिल शुरू करने के लिए भेजे गए प्रोपोजल में विभिन्न विभागों से 20 क्वैरीज लगी थी। जब से एमएचआरडी ने काउंसिल शुरू करने के बारे में कहा था तब से प्रोपोजल में कोई न कोई खामी सामने आ ही रही थी। उल्लेखनीय है कि विधानसभा सत्र के दौरान जब काउंसिल को लेकर विशेष विधेयक पारित होगा, उसके बाद रूसा के तहत शिक्षा को लेकर होने वाले सभी कार्य करवाने के लिए सरकार व मंत्री के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। च्वाइस बेस्ड सिस्टम चेंज करना हो, चाहे यूजी में सिलेबस बदलाव को लेकर कोई कार्य करना हो, ये सब कार्य काउंसिल के सदस्यों की मंजूरी के बाद होगा। कालेजों की शिक्षा संबंधित सारी जिम्मेदारी इसी काउंसिल यानी की एक्ट में दी जाएगी। इससे पहले रूसा के तहत प्रदेश में कोई भी बदलाव या कार्य करने होते थे, उसके लिए राज्य सरकार और केंद्र से मंजूरी लेनी पड़ती थी। एमएचआरडी की ओर से यह एक बड़ी राहत प्रदान की गई है। काउंसिल में 25 सदस्य होंगे। इसमें एचपीयू के कुलपति, शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा के निदेशक अमरजीत सिंह भी मुख्य रूप से सदस्य होंगे। शिक्षा में बदलाव करना हो या फिर कोई नई निति लागू करनी हो, ये सभी अधिकार कांउसिल को दिए गए हैं। इस काउंसिल के तहत पहली बार प्रदेश में उच्च शिक्षा को बेहतर बनाया जाएगा। भारत सरकार के निर्देशों के बाद इस प्रोपोजल को मिली मंजूरी से सभी शिक्षण संस्थानों को इसी काउंसिल के अंतर्गत लाया जाएगा। खास बात यह है कि इस काउंसिल के शुरू होने के बाद प्रदेश के कालेजों में रुके निर्माण कार्यों में भी तेजी आएगी। वहीं, नए कालेजों को ज़रूरत के हिसाब से खोलने में भी कोई रुकावट पैदा नहीं होगी।

बचा बजट भी खर्च करें

प्रदेश में स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल काफी अहम है। उम्मीद जताई जा रही है कि सालों से प्रदेश के कालेजों में रूसा के तहत जो बजट खर्च नहीं हो पाया है, वह बजट भी खर्च किया जा सकता है। वहीं कालेजों में रूसा के तहत छात्रों के रुके रिजल्ट को लेकर भी काउंसिल कोई नियम बनाएगी और इसके साथ रूसा के रिजल्ट में आने वाली खामियां भी दूर की जाएंगी।

क्वालिटी भी सुधरेगी

नए वर्ष से राज्य में शुरू होने वाले स्टेट हायर काउंसिल एक्ट से शिक्षा की गुणवत्ता में काफी सुधार आएगा। शिक्षण संस्थानों की स्थिति शिक्षा विद ही अच्छे से जान पाते हैं। यह काफी सराहनीय प्रयास है। इससे शिक्षा विद कालेजों में छात्रों के समक्ष आने वाली समस्यायों को जमीनी स्तर पर समझते हुए छात्र व शिक्षा के हित में फैसला लेने में कामयाब हो पाएंगे।

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Courtsey: Divya Himachal
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