मंडी – हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने एक मजदूर की याचिका पर निर्णय देते हुए सरकार को आदेश दिए कि वह उसे 2017 की बजाय 2000 से नियमित करे। इस अवधि के तमाम वेतन-भत्तों के एरियर का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए। बहादुर सिंह पुत्र मंगरू राम गांव लोट छपराहण जिला मंडी ने अपने वकील आजाद कैथ के माध्यम से प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी कि प्रार्थी जनवरी, 1990 से डेलीवेज के आधार पर वन विभाग में कार्य कर रहा है। उसने निर्धारित मापदंडों के अनुसार हर साल 240 दिन की अवधि भी पूरी की। उसे नियमानुसार 2000 में नियमित किया जाना था, मगर विभाग ने उसे जून 2017 में नियमित किया। इस मामले में उसके वकील आजाद कैथ ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वीके शर्मा के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के मूलराज उपाध्याय बनाम स्टेट ऑफ एचपी एंड अदर, 1994 का हवाला दिया। इस पर यह निर्णय बहादुर सिंह के हक में आया। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष जस्टिस वीके शर्मा ने सरकार व विभाग को आदेश दिए कि वह बहादुर सिंह को 2017 की बजाय पहली जनवरी, 2000 से नियमित करे और उसे इस अवधि के तमाम बढ़े हुए भत्ते व वेतन का जो एरियर है, उसका भुगतान भी नौ प्रतिशत ब्याज के साथ करे।
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