सबसे बड़े अस्पताल में नहीं है नई मशीन लगाने के लिए जगह, मरीजों को टेस्ट के लिए करना पड़ रहा महीनों इंतजार
शिमला—शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज में सीटी स्कैन और एमआरआई टेस्ट इन दिनों सबसे बड़ा मर्ज बन गए हैं। पुरानी घिसी-पिटी मशीनें किसी भी वक्त हांफ जाती हैं। यही नहीं,कई बार मशीनें खराब हो जाती हैं, जिन्हें ठीक करने में काफी समय लग जाता है। इससे रोजाना मुश्किल से 25 मरीजों की जांच हो पाती है। नई मशीनें लग जाएंगी तो रोजाना का यही आंकड़ा 150 को टच कर जाएगा। जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में मरीज सबसे पहले अपना टेस्ट करवाने के लिए चिकित्सकों के पास बार-बार फाइलें लेकर जा रहे हैं। हैरत है कि बावजूद इसके उन्हें एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आईजीएमसी में इतनी जगह नहीं है कि यहां पर नई मशीनंे लगाई जा सकें। आईजीएमसी में विदेशी कंपनियों से खरीदी गई दोनों महत्वपूर्ण मशीनें सीटी स्कैन और एमआरआई हांफ गई हैं। बावजूद इसके अगर अस्पताल प्रशासन नई मशीनें लगाने की सोचता भी है, तो कम स्पेस उनकी योजना के आड़े आता है। बजट होने के बाद भी जब तक अस्पताल का नया ट्रॉमा सेंटर नहीं बन जाता, तब तक नई एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन भी नहीं खरीदी जा सकती। वहीं, आईजीएमसी में विदेशी कंपनी से खरीदी गई एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन को दस से ग्यारह साल अस्पताल में हो चुके हैं। चौबीस घंटे अस्पताल में इन मशीनों में मरीजों के टेस्ट होते हैं। हैरत है कि बावजूद इसके अस्पताल में आने वाले सैकड़ांे मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए दो व तीन महीने की तारीख मिल रही है। अस्पताल में आने वाले मरीज भी अस्पताल की इस अव्यवस्था से परेशान हैं। वहीं, दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन जगह कम होने की वजह से मजबूर है। आईजीएमसी की यह समस्या दिन व दिन विकराल रूप लेती जा रही है। आलम यह है कि अभी अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई के एक दिन में 20 से 25 ही टेस्ट हो पाते हैं। बाकी बचे मरीजों को लंबी डेट इस टेस्ट के लिए दी जाती है। आईजीएमसी की इन दोनों मशीनों की उमर पूरी हो चुकी है। आईजीएमसी प्रशासन पिछले दो सालों से पुरानी मशीनों को ठीक करने के लिए करोड़ों का बजट खर्च कर चुका है। ऐसे में अस्पताल का मरीजों की अन्य सुविधाओं पर खर्च होने वाला बजट पुरानी मशीनों के पुर्जे ठीक करने में बर्बाद हो रहा है। पेंच यह भी है कि अस्पताल में जब तक ट्रामा सेंटर नहीं बन जाता है तब तक नई मशीन भी आईजीएमसी में नहीं लग पाएगी। प्रशासन भी इसी इंतजार में है कि कब आईजीएमसी का नया भवन बनकर तैयार हो जाए।
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Courtsey: Divya Himachal
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