शिमला-राजधानी शिमला में बंदरोें का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शिमला में बढ़ते बंदरों के आतंक से शहर के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बंदरों के आतंक से स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है। ऐसे में लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। शिमला के अस्पतालों में आए दिन बंदरों के काटने के शिकार हुए लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। खास तौर पर छोटे बच्चों की बात करें तो बच्चों में बंदरों के काटने के मामले अधिक आ रहे हैं। बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक शिमला के संजौली, ढली, लक्कड़ बाजार, टुटू, चक्कर, समरहिल, बालूगंज, जाखू, बस स्टैंड और आईजीएमसी अस्पताल क्षेत्रों में अधिक देखा जा रहा है। खासतौर पर स्कू ली बच्चों का स्कूल जाना और आना भी मुश्किल हो गया है। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में बंदरों के आतंक से सबसे ज्यादा शिकार बच्चों, महिलाएं व बुजुर्गों को होना पड़ रहा है। बंदरों ने स्थानीय लोगों के नाक में दम कर दिया है। बंदरों के काटने के ड़र से लोगों में इतना खौफ है कि लोगों को पैदल आते-जाते समय अपने बचाव के लिए अपने साथ लाठी लेकर चलना पड़ता है। यह लाठी बंदरों को डराने में काम में लाई जाती है। इससे पैदल चलने वाले लोगों को बंदरों का सामना करने में आसानी होती है। शिमला शहर के समरहिल क्षेत्र के स्थानीय निवासी नरेश ठाकुर और यूनिवर्सिटी के छात्र कार्तिक का कहना है कि समरहिल के सांगटी क्षेत्र में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस संदर्भ में प्रशासन को भी बार-बार अवगत करवाया गया है। मगर प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसके चलते स्थानीय लोगों को बंदरों के आंतक का सामना करना पड़ रहा है। शिमला शहर में बढ़ते बंदरों के आतंक की एक बड़ी वजह यह भी सामने आ रही है कि शिमला शहर में जगह-जगह कूड़ेदानों के ढेर लगे रहते हैं और इन क्षेत्रों में लोगों का आना जाना तक दूभर हो गया है। शहर में जगह-जगह कूड़ेदानों में कूड़ा फैला रहता है और इन कू ड़ेदानों पर बंदर अपना डेरा बनाए बैठे रहते हैं। लोगों द्वारा भी कूड़ेदानों में कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है और ऐसे मंे जब उस स्थान से लोगों का आना जाना होता है तो बंदर उन पर हमला कर देते हैं। अधिकतर लोगों में तो यहां तक देखा गया है कि जब बंदर काटने के लिए आता है तो लोग अपने बचाव में इधर-उधर भागते हैं और ऐसे में अनजाने में ही लोगों का एक्सीडेंट और चोट लग जाती है।
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Courtsey: Divya Himachal
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