शिमला – हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने एक निजी बस आपरेटर द्वारा निगम प्रबंधन को दिए गए लीगल नोटिस पर खेद प्रकट किया है। निगम के केवल तीन कर्मचारी नहीं बल्कि 10000 कर्मचारी उक्त निजी बस आपरेटर व अन्य निजी बसों के टाइम टेबल व परमिट में बदलाव का विरोध कर रहे हैं। समिति का आरोप है कि निजी बस आपरेटर के टाइम टेबल व परमिट में बदलाव नियमों को ताक पर रख कर किया गया है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार कॉरीडोर केवल 16 किलोमीटर से कम दूरी का होना चाहिए अन्यथा यह अंतरराज्यीय रूट परमिट में परिवर्तित हो जाएगा। उक्त निजी बस आपरेटर के रूट परमिट में किए गए वर्तमान बदलाव से पंजाब क्षेत्र में कॉरीडोर की दूरी बढ़कर 32 किलोमीटर हो गई है, जिसे विभाग द्वारा इस पूरी प्रक्रिया के दौरान छिपाया गया है तथा परिवर्तित रूट की दूरी पहले जितनी ही दर्शाई गई है। इससे जहां एक ओर निगम को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है वहीं, सड़कों पर अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा हो रही है। परिवहन कर्मचारी संयंक्त समन्वय समिति के सचिव राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि निगम के सभी कर्मचारी और संगठन ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत प्रदत अधिकारों का प्रयोग करते हुए निगम व कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। यदि निगम की आय प्रभावित होती है तो कर्मचारियों के वित्तीय लाभ भी विलंब से दिए जाते हैं। इसलिए निगम के कर्मचारी अपना नैतिक कर्त्तव्य निभाते हुए सरकार के हर उस निर्णय का विरोध करते रहेंगे, जिससे निगम को कोई नुकसान पहुंचता हो।
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