अस्पताल में दाखिल कैंसर मरीज झेल रहे दिक्कत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
शिमला – शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज के पिडियाट्रिक्स विभाग में कैंसर पीडि़त मासूमों को एमफोटेरेसीन दवाई ही नहीं मिल रही है। बता दें कि यह दवाई गंभीर कैंसर मरीजों के लिए अस्पताल में फ्री में उपलब्ध करवाई जाती है, लेकिन पिछले चार से पांच दिन से यह दवाई अस्पताल में नहीं मिल रही है, जिस वजह से कैंसर से जूझ रहे कई मासूमों को इस दवाई से वंचित रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले आईजीएमसी के पिडियाट्रिक्स विभाग में इस दवाई के समय पर न मिलने से 11 साल के मासूम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। अस्पताल प्रशासन सहित अन्य चिकित्सकों के लिए भी यह चिंता का विषय बनता जा रहा है। आईजीएमसी प्रशासन ने राजधानी के सभी केमिस्टों से भी इस बारे में बात की और जानने का प्रयास किया की आखिर यह दवाई बाजार में उपलब्ध क्यों नहीं करवाई जा रही है। अस्पताल के विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमफोटेरेसीन दवाई न केवल राजधानी, बल्कि पूरे प्रदेश में ही नहीं मिल पा रही है। कारण यह बताया जा रहा है कि, जिस कंपनी से इस दवाई को मंगवाया जाता है, उसी कंपनी ने सप्लाई प्रदेश में बंद कर दी है, जिसका कारण अस्पतालों में खुल रहे जेनरिक स्टोर का कारण बताया जा रहा है। बता दें कि आईजीएमसी में पिडियाट्रिक्स विभाग में चिकित्सक कई बार अपने लेवल पर चंड़ीगढ या बाहरी राज्य से यह दवाई मंगवा रहे हैं।
चार से पांच हजार आता है खर्चा
जिस दवाई व इंजेक्शन के लिए मरीजों को पैसे नहीं देने पढ़ते थे, वही अब एक एमफोटेरेसीन इंजेक्शन और दवाई के लिए मरीजों को चार से पांच हजार रुपए तक जेब ढीली करनी पढ़ती है।
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