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Saturday, May 26, 2018

हाइड्रेंड खराब, कैसे बुझेगी आग

शिमला – राजधानी शिमला में आग लगने पर इसे बुझाने के लिए आसानी से पानी नहीं मिल पाता। दमकल कर्मियों को फायर टेंडरों को भरकर लाना पड़ता है, लेकिन मौके पर फायर टेंडरों के लिए पानी ही नहीं मिल पाता। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि शहर में आधे से ज्यादा फायर हाइड्रेंट खराब हालात में है। वहीं जाखू सहित कई क्षेत्रों में दो इंच की पाइप में फायर हाइडे्रंट लगाए गए हैं, लेकिन इनमें पानी का प्रेशर नहीं बन पाता। जानकारी के अनुसार शिमला शहर में 580 हाइड्रेंट विभिन्न क्षेत्रों में लगे हुए हैं, लेकिन ये मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर इनसे पानी नहीं मिल पाता। इसकी वजह है कि इनमें से करीब 50 फीसदी  हाइड्रेंट खराब चल रहे हैं या इनमें से कई दब चुके हैं। शिमला शहर के केंद्रीय क्षेत्र में ही हाइड्रेंटों की हालात सही नहीं है। शहर में फायर हाइड्रेंट की हालात का पता इस बात से चलता है कि शहर कोर एरिया यानी फायर स्टेशन मालरोड के तहत पड़ने वाले क्षेत्र में लगे 244 हाइड्रेंट से करीब 112 ही काम कर रहे हैं, जबकि बाकी फायर हाइड्रेंट खराब हैं। वहीं, हालात यह है कि कई जगह हाइड्रेंट काम तो कर रहे हैं, लेकिन इनमें पर्याप्त प्रेशर नहीं होता। इसकी एक वजह छोटी पाइपों में हाइड्रेंट का लगना है।  शुक्रवार को जिस जगह में होटल में आग लगी, वह एरिया भी जाखू क्षेत्र में ही पड़ता है। इस तरह फायर हाइड्रेंट लगाने के नाम यहां भी खानापूर्ति की गई है। कुछ समय पहले लक्कड़ बाजार में दुकानों में लगी आग के समय में भी यही स्थिति आई थी। यहां भी फायर हाइडे्रंट में पानी ही उपलब्ध नहीं था। वहीं फायर हाइड्रेंट में कम पानी होने की एक बड़ी वजह नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से पानी के कनेक्शन भी बांटना भी है। शिमला शहर की जिन कई मुख्य लाइनों में हाइड्रेंट लगे हैं, उनसे नगर निगम ने कई घरों को पानी के कनेक्शन बांट दिए हैं। इससे आग लगने पर यदि इन लाइनों में पानी छोड़ भी दिया जाता है तो यह लोगों के घरों में पहुंच जाता है।

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