मतियाना – उपमंडल कुमारसैन के कांगल में बना आयुर्वेदिक अस्पताल लोगों के लिए मात्र सफेद हाथी ही साबित हो रहा है। अस्पताल में पिछले दस सालों से डाक्टर का पद खाली चल रहा है और फार्मासिस्ट भी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में तैनात मिड वाइफ, चौकीदार व स्वीपर पर क्षेत्र के लोगों की सेहत का जिम्मा सौंप रखा है। इस अस्पताल से क्षेत्र की छह पंचायतों कांगल, कोटीघाट, जंजैहली, मोगडा, बनाहर व बाग आदि की करीब आठ हजार की आबादी लाभान्वित होती है। डाक्टर के न होने से यहां की जनता खासी परेशान है। लोगों को इलाज के लिए कुमारसैन अथवा रामपुर जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ में पैसों की बर्बादी भी होती है। कांगल पंचायत के उपप्रधान विनोद नेगी ने बताया कि विभाग की लापरवाही के कारण कांगल अस्पताल मात्र शोपीस बन कर रह गया है। पंचायत के माध्यम से कई बार सरकार व विभाग से अस्पताल में रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की, पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग इतने लंबे समय से मात्र एक मिड वाइफ के सहारे अस्पताल चलाकर क्षेत्र के लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। स्थानीय लोग तथा पंचायत प्रतिनिधि कई वर्षों से खाली पड़े पदों को भरने की मांग कर रहे है, पर विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। कांगल प्रधान रोशनी देवी, जंजैहली प्रधान पिंकी ठाकुर, कोटीघाट प्रधान किरण ठाकुर, कांगल उपप्रधान विनोद नेगी, मोगडा प्रधान नंदलाल नेरटु, पूर्व प्रधान हितेश शर्मा, पूर्व प्रधान हेमंत वर्मा, व्यापार मंडल कांगल प्रधान खेमानंद, बीडीसी कांगल रूपलाल तथा स्थानीय जनता ने सरकार व विभाग से कांगल अस्पताल में डाक्टर की जल्द तैनाती की मांग की है तथा चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मांग जल्द पूरी नहीं की गई तो क्षेत्र की जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगी और इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की ही होगी।
^पूरी खबर पढ़े: source - DivyaHimachal
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