शिमला – मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने पुराने किले को फतेह कर लिया है, जिस पर दस साल से भाजपा का कब्जा था। शहर के वीआईपी वार्ड जाखू में एक दफा फिर से कांग्रेस का परचम लहरा गया है। इस सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा कर रखा था वह भी तब जबकि खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र का निजी आवास यहां है और वे यहीं पर रहते हैं। ऐसे में ये अहम था कि जाखू वार्ड में वापस कांग्रेस सत्ता में आती। यहां से कांग्रेस की पार्षद अर्चना धवन जीती हैं जोकि वीरभद्र सिंह की कट्टर समर्थक मानी जाती हैं। शहर में वीआईपी वार्डों की बात करें तो यहां अधिकारियों व कर्मचारियों ने कुल मिलाकर कांग्रेस व भाजपा दोनों पर अपना विश्वास जताया है। जहां जाखू में भाजपा को झटका लगा है वहीं बैनमोर में भाजपा अपनी सीट को बचाने में कामयाब हुई है। यहां से दूसरी दफा सीट भाजपा की झोली में गई है, जिस पर किमी सूद ने जीत हासिल की। यहां पर बड़ी संख्या में वीवीआईपी मतदाता रहते हैं, जिनमें अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ छोटा शिमला वार्ड में जहां सचिवालय भी है और कर्मचारियों की कालोनियां भी वहां पर कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के राकेश चौहान ने यहां पर जीत दर्ज की है। इसी तरह से पंथाघाटी वार्ड जहां अफसरों की कालोनियां हैं और सरकारी आवास भी हैं वहां पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आया है। यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही उम्मीदवार के चयन को लेकर दिक्कत हुई, जिसके चलते भाजपा का निर्दलीय पार्षद जीतकर आया है। नगर निगम में प्रत्याशियों के अपने रसूख का अहम महत्त्व रहा है। इनके रसूख पर ही यहां चुनाव हुआ। इसमें व्यक्ति विशेष की छवि को देखते हुए मतदान किया गया है। इन वीआईपी वार्डों में प्रत्याशियों की छवि को देखकर मतदान हुआ, जिसके चलते यहां पर कांग्रेस भाजपा से अलग निर्दलीय भी जीतकर आया है।
रूल्दूभट्ठा में कांगे्रस चौथी दफा चित्त
शिमला- नगर निगम शिमला के वार्ड नंबर-दो रूल्दूभट्टा में एक दफा फिर से कमल खिला है। यहां भाजपा का प्रत्याशी चौथी दफा लगातार जीत दर्ज करने में कामयाब हो सका है। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटर हैं, जिन्होंने भाजपा पर अपना विश्वास जताया। वैसे राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष दिलदार बट्ट ने यहां प्रचार कर मुस्लिम वोटरों को रिझाने की कोशिश की लेकिन दूसरा कोई मुस्लिम नेता यहां नहीं पहुंचा जिससे रूल्दूभट्ठा वार्ड में कांगे्रस को चुनावी हार झेलनी पड़ी है।
शिमला ग्रामीण में आत्म चिंतन की जरूरत
शिमला- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण में कांग्रेस को आत्म चिंतन करने की जरूरत है। इसके दो वार्ड टूटू और मजयाठ नगर निगम के दायरे में आते हैं और दोनों वार्डों में से कांग्रेस व भाजपा एक-एक में विजयी रही है। आखिर मुख्यमंत्री के इस विस क्षेत्र के टूटू वार्ड में कांग्रेस की हार के क्या मायने हैं इसपर सोचना जरूरी है। टूटू क्षेत्र से इससे पहले भी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लीड नहीं मिल पाई थी और अब नगर निगम में पार्षद ही भाजपा का जीता है। निगम का ये चुनाव इस दिशा में कांग्रेस व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए कुछ संदेश दे गया है।
अपनों ने ही डुबोई कांग्रेस की लुटिया
शिमला- विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर शिमला से चुनाव लड़ चुके पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष हरीश जनारथा के कई महारथी भी मैदान में उतरे हुए थे। इक्का दुक्का लोगों के अलावा उनमें से कोई जीत नहीं पाया है, जिसकी शिमला कांग्रेस खासी चर्चा कर रही है। शिमला में कांग्रेस के दो गुट हैं और एक गुट का नेतृत्व हरीश जनारथा करते हैं। हालांकि दूसरे गुट के भी कई महारथी फिसड्डी निकले हैं, परंतु सत्ता में रहते हुए जनारथा यहां पर अपने लोगों को जीत नहीं दिला पाए जो काफी अहम है। जनारथा संजौली क्षेत्र में रहते हैं और पूर्व में नगर निगम के उप महापौर भी रह चुके हैं। अहम बात ये है कि संजौली वार्ड में जहां जनारथा रहते हैं वहां पर भाजपा जीती है। यही नहीं उनके कट्टर समर्थक जोकि पहले पार्षद रहे हैं उनके वार्डों में भी भाजपा ही जीतकर सामने आई है। ये कहें इस चुनाव में शिमला कांग्रेस की गुटबाजी भी भारी पड़ी और अपनों ने ही कांग्रेस की लुटिया को डुबो दिया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
संजौली-ढली में बीजेपी की जीत
शिमला- नगर निगम शिमला के चुनावों कांग्रेस की हार तो हुई है साथ में इसके गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी बेजीपी का बोलबाला रहा है। शहर के उपनगर संजौली व ढली में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई है, इन जगहों पर बेजीपी की जीत हुई है। नगर निगम चुनावों के नतीजे कांग्रेस पार्टी के लिए शुभ नहीं माने जा रहे। संजौली व ढली इलाके में ऊपरी शिमला के लोगों की वर्चस्व है। ऊपरी शिमला के लोगों का बाहुल्य होने से कांग्रेस भी यहां अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही थी। संजौली व ढली इलाका शिमला विधानसभा शहरी क्षेत्र में शामिल है।
वोटरों ने निकाला आक्रोश
शिमला – नगर निगम शिमला के चुनाव में पूर्व पार्षदों की कार्य प्रणाली का असर भी चुनाव नतीजों में देखने को मिला। इसका अंदाजा इससे बखूबी लगाया जा सकता है कि जिन वार्डों में पूर्व पार्षदों की कार्य प्रणाली शून्य रही है उन वार्डों में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का सुपड़ा साफ हुआ है। इन वार्डों में भराड़ी, जाखू और लोअर बाजार वार्ड शामिल है। इन वार्डों से पूर्व में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों सरदारी हासिल की थी। मगर पांच वर्षों के दौरान जनता की कई मूलभूत सुविधाएं (जरूरतें) पूरी न होने के चलते इसका असर इन चुनाव नतीजों में देखने को मिला। इन वार्डों की असंतुष्ट जनता ने मतदान में रोष व्यक्त कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। उक्त वार्डों में परिवर्तन की लहर देखने को मिली है। जहां पूर्व में इन वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। उन वार्डों पर अब कांग्रेस पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के पार्षद की कुर्सी पर कब्जा जमाया है। भराड़ी, जाखू और लोअर बाजार वार्ड की जनता ने चुनाव में अपना आक्रोश दिखाया।
यहां रहा करीबी मामला
वार्ड प्रत्याशी जीत का अंतर
भराड़ी तनूजा- कांग्रेस 10
कैथू सुनील भाजपा 21
मजियाठ दिवाकर कांग्रेस 7
नाभा सिमीनंदा कांग्रेस 15
जाखू अर्चना धवन कांग्रेस 16
इंजनघर आरती चौहान भाजपा 22
शांति विहार शारदा चौहान निर्दलीय 5
मल्याणा कुलदीप कांग्रेस 24
पंथाघाटी राकेश निर्दलीय 45
विकासनगर रचना निर्दलीय 18
सबसे अधिक 66 फीसदी वाले
वार्ड शांति विहार और नाभा वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे। हालांकि शांति विहार में निर्दलीय प्रत्याशी को विजय मिली, पर उसे कांग्रेस का समर्थन है, जबकि सबसे कम वोट प्रतिशतता वाला वार्ड बेनमोर भाजपा के पक्ष में गया। यहां सबसे कम 47 फीसदी वोटिंग हुई।
पार्टी 2012 2017
भाजपा 12 17
कांग्रेस 11 12
माकपा 2 1
माकपा (मेयर व डिप्टी मेयर)
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