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Thursday, April 6, 2017

बारिश से सेब की फ्लावरिंग को नुकसान

ठियोग —  मंगलवार रात को अपर शिमला के ठियोग सहित अन्य इलाकों में भारी बारिश के कारण खासतौर से निचले क्षेत्रों में सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इन दिनों निचले इलाकों में सेब में फ्लावरिंग जोरों पर है, लेकिन ठीक समय पर बारिश व ठंड के कारण सेब की सेटिंग पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मंगलवार को भारी बारिश के अलावा कई जगह हल्की ओलावृष्टि भी हुई है, जिससे सेब तथा सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है। सेब के बागीचों में फ्लाविरंग के समय में ठंड पड़ने से बागबान परेशान हैं और साल भर की फसल को लेकर चिंतित हैं। पिछले वर्ष भी सेब की फसल कम थी और ऐसे ही समय में बारिश व ठंड पड़ने के कारण फ्लावरिंग पर असर पड़ा था और इस बार भी कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आ रही है। हालांकि इस बारिश व नमी होने के कारण सब्जी उत्पादकों ने राहत की सांस भी ली है, क्योंकि पिछले काफी समय से बारिश न होने के कारण खेतों में लगी फ्रासबीन व मटर की फसल को नुकसान हो रहा था। बागबानी विशेषज्ञ की मानें तो फ्लावरिंग के दौरान तापमान यदि सामान्य स्थिति में रहता है तो सेब की अच्छी सेटिंग होने की उम्मीद रहती है, लेकिन तापमान में गिरावट आने पर फूल में परागण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, जिससे कि सेब की सेटिंग पर असर पड़ता है। निचले क्षेत्रों में भी सेब की अच्छी सेटिंग होने की सूचनाएं मिल रही हैं।  अच्छी सेटिंग के लिए तापमान 15 डिग्री से अधिक होना चाहिए रात में मौसम साफ  रहता है तो यह भी हानिकारक माना जाता है, क्योंकि रात के समय कोहरा गिरने से तापमान बेहद निचे गिर जाता है और इससे पौधों की पंखूडियां सिकुड़ जाती हैं। तापमान इस दौरान सामान्य स्थिति में रहे तो तभी अच्छी पैदावार होने की उम्मीद रहती है। इन दिनों निचले  इलाकों में सेब की फ्लावरिंग व सेटिंग हो चुकी है और देखने में आ रहा है कि सेब की इन क्षेत्रों में अच्छी फसल है। ठियोग में बारिश का दौर बुधवार को भी जारी रहा इस कारण स्कूली छात्रों को स्कूल पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ा।  इसके अलावा नदी-नालों  में सिल्ट भरने से पानी की अधिकतर योजनाएं नहीं चल सकीं।

सेटिंग के लिए 15 डिग्री चाहिए तापमान

सेब में अच्छी सेटिंग के लिए तापमान 15 डिग्री से अधिक होना चाहिए रात में मौसम साफ  रहता है, तो यह भी हानिकारक माना जाता है, क्योंकि रात के समय कोहरा गिरने से तापमान बेहद नीचे गिर जाता है और इससे पौधों की पंखुडि़यां सिकुड़ जाती है। तापमान इस दौरान सामान्य स्थिति में रहे तो तभी अच्छी पैदावार होने की उम्मीद रहती है।


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source: DivyaHimachal

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