रोहड़ू — मंगलवार रात से अपर शिमला के क्षेत्रों में रिमझिम बारिश हो रही है, जिससे सेब की फसल पर भी बूरा असर पड़ रहा है। इन दिनों निचले क्षेत्रों में, जहां तीसरी फ्लावरिंग चल रही है, वहीं मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहली फ्लावरिंग चल रही है। बारिश होने से फ्लावरिंग पर सीधा असर पड़ रहा है। मधुमक्खियों की पेटियां तो बागबानों ने बागीचों में किराया देकर पहुंचा दी हैं, लेकिन बारिश होने से ठंड हो गई है, जिससे मधुमक्खियां परागण करने बाहर नहीं निकल रही हैं। अब तक सेब की पैदावार के लिए अनुकूल चल रहे मौसम ने अचानक करवट बदली है और अब इस बारिश से दोहरी मार पड़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक मधमक्खियां परागण नहीं करेंगी, तो सेब की पैदावार अच्छी नहीं होगी। हालांकि अब तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फ्लावरिंग नहीं हुई है, लेकिन एक सप्ताह के अंदर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी पहली फ्लावरिंग शुरू हो जाएगी। मौसम का मिजाज ऐसे ही रहा तो इस बार सेब की पैदावार फिर से कम होगी। बारिश होने से ठंड भी बढ़ गई है, जहां दो दिन पहले लोगों ने जैकेट और स्वाटर पैक कर दी थी, वहीं बाजार में लोग बुधवार को स्वाटर और जैकेट सहित कई गर्म कपड़ों को पहने नजर आए। इसके अलावा बारिश से ठंड बढ़ने से अब पाले की संभावना भी बढ़ गई है। पाला पड़ने से सेब के फूलों के परागण जल जाते है, जिससे उस फूल पर मौसम साफ होने के बावजूद भी परागण क्रिया सफलता नहीं हो पाती है और बागीचे में कम सेब की पैदावार होती है। बागबानी विशेषज्ञ डा. नरेंद्र कायथ ने बताया कि इस बार हुई यह बारिश सेब पर दोहरी मार डाल रही है, जिससे न सिर्फ परागण क्रिया प्रभावित हो रही है और इससे अब पाला पड़ने के भी आसार बढ़ गए हैं।
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source: DivyaHimachal
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