शिमला — राज्य में शराब ठेकों के लिए खरीददार नहीं मिल रहे हैं। राज्य में भारी संख्या में ठेके बिकने से रहे गए हैं। बुधवार को ठेकों की नीलामी के लिए आखिरी दिन तय किया गया था, लेकिन इस दौरान भी कई ठेके बिके बिना रह गए। शिमला जिला में भी आबकारी एवं कराधान विभाग को ठेकेदार नहीं मिल पा रहे हैं। 31 मार्च को नीलामी के आखिरी दिन भी कई ठेके बिकने से रह गए थे। इसके बाद बुधवार का दिन ठेकों की नीलामी के लिए तय किया गया था, लेकिन बताया जा रहा है कि अब भी काफी संख्या में ठेके बिकने से रह गए हैं। शिमला जिला में बुधवार को फिर से शराब के ठेकों के लिए नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। जिला में कुल 17 यूनिटों के लिए नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन मात्र तीन ही यूनिटें बिक पाई हैं। इन यूनिटों को 13 करोड़ में बेचा गया है। इससे पहले शिमला जिला में इससे पहले आठ यूनिटें बिकी थीं। यह यूनिटें 49.86 करोड़ में बिकी थीं। इस तरह आबकारी विभाग की कुल 11 यूनिटें अभी तक 62.86 करोड़ में बिकी हैं। बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग ने पिछली सभी युनिटों के लिए पहले रिजर्व प्राइस 176 करोड़ रुपए रखा था। इस वजह से कई यूनिटें बिकने से रह गई थी। वहीं तीन और यूनिटों के बिकने से अभी तक मात्र कुल मिलाकर 62.86 करोड़ रुपए ही विभाग को बिक्री से मिले हैं। ठेकों के न बिकने की एक बड़ी वजह रिजर्व प्राइस में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। अबकी बार राज्य के सभी जिलों में एक साथ करोड़ों की बिडिंग फीस विभाग ने बढ़ाई है। वहीं नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे के आसपास शराब के ठेके न लगाने के कोर्ट के आदेश भी इन ठेकों की बिक्री में बड़ी अड़चन बने हुए हैं। ठेके नीलाम न होने के चलते विभाग को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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source: DivyaHimachal
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