शिमला— सुन्नी-भज्जी विकास संस्था ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जंगली जानवरों और बंदरों के कारण सुन्नी तहसील के जिन किसानों, बागबानों ने खेती करनी छोड़ दी है उनकी गिरदावरी करवाकर सरकार उचित मुआवजे की व्यवस्था करे। यहां जारी एक बयान में सुन्नी-भज्जी विकास संस्था के प्रधान गुरुदत्त शर्मा ने कहा कि बंदरों व जंगली जानवरों के कारण सुन्नी-धामी क्षेत्र के किसानों ने खेतीबाड़ी करनी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देकर समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में फूल, लकड़ी और कांग्रेस घास के कारण पर्यावरण व वनस्पति पर विपरीत असर पड़ रहा है, लेकिन सरकार से बार-बार आग्रह करने पर भी सरकार खामोश है और किसान सरकार व विभाग से समाधान की अपेक्षा कर रहा है। गुरुदत्त शर्मा ने कहा कि शाली माता मंदिर शिमला के नजदीक होने के बावजूद आज भी उपेक्षा का शिकार है, जबकि इसे पर्यटन और तीर्थ स्थल के तौर पर विकसित किया जा सकता है, जिसका आग्रह सरकार से क्षेत्र की जनता बार-बार कर रही है। उन्होंने कहा कि सुन्नी में बस अड्डे का शिलान्यास काफी पहले किया जा चुका है परंतु अभी भी कार्य आरंभ नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि दलोह घाटी-धरोगड़ा सड़क के निर्माण करने की घोषणा सरकार ने वर्ष 2014 में की थी परंतु अभी तक कार्य ही शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि धरोगड़ा व खटनोल में पीएचसी खोलने की घोषणा भी बहुत पहले हो चुकी है, परंतु स्टाफ की कमी के कारण स्थानीय जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सुन्नी में डाक्टरों और अध्यापकों के पद रिक्त पड़े होने के कारण लोगों करे असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
पूरी खबर पढ़े >>
source: DivyaHimachal
No comments:
Post a Comment