शिमला – किसानों की दस बीघा जमीन को नियमित करने की मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर हिमाचल किसान सभा ने सरकार पर हमला बोला है। किसान सभा राज्याध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह तंवर ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब सैकड़ों किसानों के लाखों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल चुकी है, घर तोड़े जा चुके हैं और किसान बर्बाद हो चुके हैं तब जाकर सरकार को होश आया है। 28 अगस्त, 2015 की घोषणा के 16 महीने बाद पहली बार उच्च स्तरीय कमेटी की एक बैठक हो पाई है। डा. तंवर ने कहा कि उन्हें अभी भी सरकार पर भरोसा नहीं है कि वह किसानों को राहत दे पाएगी। ऐसा लगता है कि इन दिनों धड़ाघड़ की जा रही सैकड़ों चुनावी घोषणाओं की तरह यह भी एक चुनावी घोषणा भर है। उन्होंने कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि अब सरकार कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर अपने हाथ खड़े नहीं करेगी, जबकि हाल ही में कोर्ट ने 28 फरवरी, 2017 तक तमाम कब्जे हटाने के आदेश जारी किए हैं। डा. तंवर ने कहा कि ऐसी ही घोषणा 2002 में पूर्व सरकार ने भी की थी, जिसमें किसानों को 20 बीघा जमीन नियमित करने का आश्वासन दिया गया था। उसी आश्वासन के चलते किसानों ने पौधे लगाए थे ,लेकिन जब तक उन पौधों के फल देने की बारी आई तब तक उन पर कुल्हाड़ी चला दी गई, लेकिन 2002 में किसानों से नियमितीकरण के लिए आवेदन मांगने वाली भाजपा भी प्रतिपक्ष में बैठक कर किसानों की बर्बादी की मूक दर्शक बनी रही। चुनाव नजदीक आने पर उन्हें फिर से किसानों की याद आने लगी है और भूमि नियमित करने की बात कह रही है। उन्होंने मांग की है कि जिन किसानों के पौधे काटे गए हैं और घर तोड़े गए हैं उन्हें सरकार मुआवजा दे और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करे। सरकार उन किसानों को पौधे मुहैया करवाए और कटे हुए पौधों की उम्र के हिसाब से औसत लागत मूल्य के मुताबिक किसानों की क्षतिपूर्ति करे। उन्होंने कहा कि सरकार के ढीलमपन और असंवेदनशीलता के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है, जिसके लिए सरकार को प्रभावितों के प्रति खेद प्रकट करना चाहिए।
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source: DivyaHimachal
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