शिमला — कयासों के अनुरूप हमीरपुर में कांग्रेस व भाजपा के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। हालांकि भाजपा नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि हमीरपुर में भाजपा जीत के अंतर को देख रही है। अनुराग का जीतना तय है। मोदी लहर का तो उन्हें लाभ मिलेगा ही, पांच वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां व क्रिकेट को बुलंदियों तक ले जाने का सिला भी वोटर देगा। विश्लेषकों की राय में कांग्रेस के राजेंद्र राणा यहां भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर को कांटे की टक्कर दे रहे हैं। बावजूद इसके जीत-हार का अंतर कोई ज्यादा नहीं हो सकेगा। अब होगा क्या, इसकी असलियत शुक्रवार साढ़े 11 बजे के बाद पता चल जाएगी। दोनों ही प्रत्याशी यहां जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहे हैं। उधर, शिमला संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लाल ब्राक्टा और भाजपा उम्मीदवार वीरेंद्र कश्यप के बीच भी कांटे की टक्कर है। दोनों ही दलों के लिए हमीरपुर की ही तर्ज पर यह सीट भी प्रतिष्ठा से जुड़ी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए यह सीट खास प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है। चूंकि अभी तक इस सीट पर वर्ष 2009 के चुनावों को यदि छोड़ दें तो जीत-हार के समीकरण वही तय करवाते आ रहे हैं। मोदी लहर में अब कांग्रेस का यह किला कितना अभेद्य रहता है, यह तो शुक्रवार को ही पता लगेगा। कांगड़ा में शांता की जीत के प्रति भाजपा ही नहीं कई कांग्रेसी भी आश्वस्त दिख रहे हैं। इसके पीछे दलील यह भी है कि शांता इसे अपने राजनीतिक जीवन का अंतिम चुनाव बताकर लड़ रहे हैं। दूसरे केंद्र में मोदी सरकार बनने की स्थिति में उन्हें मंत्रिपद भी मिल सकता है। मंडी संसदीय क्षेत्र वीआईपी क्षेत्र है। यहां मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी चुनाव में उतरी हैं। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस सीट पर मोदी लहर का असर दिखेगा, मगर विश्लेषक कुल्लू व जनजातीय वोट बैंक में सेंधमारी की गहराई को हार-जीत का पैमाना मानकर चल रहे हैं।
from Divya Himachal
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