बीबीएन — प्रदेश के तीन दवा उद्योगों में निर्मित दवाइयां गुणवत्ता की कसौटी पर फेल हो गई हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा देश भर में हर माह दवाइयों के लिए जाने वाले सैंपलों की जांच में हिमाचल के तीन दवा उद्योगों में निर्मित दवाइया निम्न स्तर क ी पाई गई हैं। सीडीएससीओ द्वारा किए गए परीक्षण के दौरान 15 नामी फार्मा कंपनियों में निर्मित 17 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए हैं, इनमें तीन फार्मा कंपनियां हिमाचल की हैं। गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाली दवाइयों के ये सैंपल सीडीएससीओ ईस्ट जोन कोलकाता, सीडीएससीओ बेस्ट जोन मुबंई, सीडीएससीओ गोवा, सीडीएससीओ साउथ जोन चेन्नई, असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर केरल, ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट ओडिशा, ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट त्रिपुरा, ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट असम व अरुणाचल प्रदेश ने भरे थे। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने मानक गुणवत्ता की कसौटी पर खरे न उतरने वाले दवा उत्पादों को जल्द से बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा अप्रैल, 2014 के ड्रग अलर्ट में जिन 15 कंपनियां की दवाओं के सैंपल परीक्षण के दौरान फेल हुए हैं, उनमें से तीन फार्मा कंपनियां हिमाचल के झाड़माजरी, पांवटा साहिब व कालाअंब औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित हैं। इसके अलावा नई दिल्ली, जयपुर, इंदौर, गुजरात, औरंगाबाद, गुवाहाटी, उत्तराखंड व तमिलनाडु की कंपनियों क ी दवाओं के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतर सके हैं। जारी अलर्ट के मुताबिक देश भर में जिन 17 दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें टेबलेट, क्रीम, गर्भ निरोधक, ड्राई सिरप व सस्पेंशन शामिल हैं। इस उद्योग में बिना अनुमति दवा निर्माण चल रहा था। उधर, इस बाबत हिमाचल के ड्रग कंट्रोलर नवनीत मारवाहा ने बताया कि प्रदेश में निर्मित जिन तीन कंपनियों के दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं, उन कंपनियों को नोटिस जारी कर बाजार से फेल हुए दवा उत्पादों का पूरा बैच उठाने के आदेश जारी किए गए हैं।
from Divya Himachal
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