शिमला — राज्य के लोक निर्माण विभाग के पास प्रदेश की जनगणना गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए कोई निर्धारित नीति नहीं है। इसका खुलासा कैग ने अपनी रिपोर्ट में किया है। कैग ने कहा है कि विभाग ने सभी जनगणना गांवों को सड़कों से जोड़ने के लिए कोई दीर्घकालीन नीति नहीं बनाई है, जिससे अभी कई गांव सड़कों से वंचित हैं। कैग ने विभाग द्वारा खर्च की गई राशि पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008 से 2013 के मध्य विभाग ने विभिन्न सड़क योजनाओं पर 1084.14 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की है। वर्ष 2008-09 के मध्य 134.66 करोड़, 2009-10 में 224.30 करोड़, 2010-11 में 242.55 करोड़, 2011-12 में 232.99 करोड़ और 2012-13 में 249.64 करोड़ रुपए की राशि प्राधिकृत बजट से अधिक खर्च की है। लोक निर्माण विभाग का 15.21 करोड़ का बजट टे्रजरी से समय पर नहीं निकालने के कारण लैप्स होने का जिक्र भी रिपोर्ट में किया गया है। विभाग मार्च, 2013 तक निर्धारित कार्यों को भी समय पर पूरा नहीं कर पाया। ऐसे उसके पास 823 कार्यों का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से 183 कार्य ही पूर्ण हो पाए। इन पर 152.74 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च हुई और शेष 640 कार्यों के लिए 126.50 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी थी। कुल 171 मामलों में विभाग को 10.43 करोड़ की राशि मुआवजे के रूप में वसूल करनी थी, लेकिन विभाग मई, 2013 तक 36 मामलों में 2.86 करोड़ की राशि ही वसूल कर पाया। महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में विभाग पर गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर खामियां भी उजागर की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी स्टाफ के अभाव में क्वालिटी कंट्रोल प्रभावित हो रहा है। वहीं विभाग के पास सामग्री टेस्टिंग के लिए लैबोरेटरी नहीं है। वहीं इससे संबंधित विशेषज्ञों की भी कमी है।
from Divya Himachal
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