बिलासपुर — प्रदेश के महाविद्यालयों में स्टूडेंट्स की गतिविधियों के साथ ही बाहरी तत्त्वों पर नजर रखने के मकसद से सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बिलासपुर कालेज में लंबी समयावधि बीतने पर भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। छात्र संघ चुनाव भी जल्द हो सकते हैं। ऐसे में कालेज के भीतर घुसकर फ्रेशर्ज की रैगिंग करने के साथ ही झगड़ा-फसाद करने वाले बाहरी तत्त्वों से निपटने में इस बार भी कालेज प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी होगी। यहां बता दें कि प्रदेश भर के कालेजों में रैगिंग के मामले और बाहरी तत्त्वों द्वारा कालेज में घुसकर झगड़े करने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने पिछले साल कालेजों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। प्रदेश के अधिकतर कालेजों में इस योजना को शुरू किया जा चुका है, लेकिन यहां बिलासपुर कालेज में शैक्षणिक सत्र शुरू पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना इस बार भी सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। कालेज प्रशासन का तर्क है कि कालेज के नए व पुराने भवनों के साथ ही छात्र व छात्राओं के होस्टलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश हैं, लेकिन इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए कम से कम अढ़ाई लाख रुपए के बजट की दरकार है। हालांकि पिछले साल बजट की स्वीकृति के लिए सरकार को लिखा गया था, लेकिन अभी तक बजट अलॉट नहीं हो सका है। ऐसे में अब दोबारा बजट सेंक्शन के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कालेजों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद रैगिंग के मामले सामने आते हैं। इसके साथ ही बाहरी तत्त्वों के भीतर घुसकर छात्रों के साथ मारपीट करने के मामले भी सामने आए हैं, जिन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार ने सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना तैयार की थी। इस योजना का फायदा यह है कि एक तो कालेज प्रशासन परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियों पर पूरी नजर रख सकेगा, वहीं बाहरी तत्त्वों पर भी पैनी निगाह रहेगी।
source: DivyaHimachal
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