मंडी — जिला की सराजघाटी के केयोलीधार क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ देवी महाकाली लंबोदरी बुधवार को अपने समस्त हारियानों संग शिकारी माता रवाना होंगी। देवी लंबोदरी प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता शिकारी योगिनी और माता भद्रकाली से अलौकिक दैवीय शक्तियां अर्जित करेंगी। देवी के नए देवरथ बनने के उपरांत पांचों हारियानों जिसमें थरजुण हार, बुराहण हार, बह हार, बटांद हार और पनसीर हार द्वारा देवी को संयुक्त रुप से शिकारी देवी को शिकारी मंदिर ले जाया जा रहा है। देवी महाकाली लंबोदरी शिकारी माता से देवीय शक्तियां प्राप्त करने को लेकर अपने नए देवरथ पर सवार होकर जाएंगी। इसके लिए देवी के समस्त कारकूनों व समस्त हार-हारियानों की तरफ से तैयारियों पूरी कर ली जा चुकी हैं। देवी के संग पांच हारियानों के कामी-धामी समस्त श्रद्धालु शिकारी माता जाएंगे। 15 मई को शिकारी माता के जाने को लेकर बुधवार प्रातः आठ बजे देवी महाकाली का नया देवरथ थरजुण गांव स्थित देवी भंडार से बाहर निकलेगा। तदोपरांत देवी महाकाली लंबोदरी लोक वाद्य यंत्रों पर बजने वाले देवधुनों पर नृत्य कर सभी हार-हारियानों को अपना आशीर्वाद देंगी। इसके उपरांत देवी अपने समस्त कामी-धामियों व हारियानों संग शिकारी माता के लिए रवाना होंगी। देवी अपने नए देवरथ संग थरजुण गांव से बुराहण, कांढा, घुलाहची, बड़ा नरोल होते हुए शिकारी माता मंदिर तक कामी-धामियों के कंधों पर सवार होकर जाएगी। देवी महाकाली छोटा नरोल व बड़ा नरोल में माता टेक देवीय शक्तियां प्राप्त करेंगी। बड़ा नरोल में पहुंचते ही बकरे की बलि दी जाएगी। देवी शिकारी माता मंदिर पहुंच मां का आशीर्वाद ग्रहण करेंगी। 15 मई की सांझ देवी शिकारी माता के मंदिर में ही विराजमान रहेंगी। 16 मई को देवी अपने लोक वाद्य यंत्रों पर बजने वाली देवधुनों पर देव क्रियाएं पूरी करेंगी और माता शिकारी योगिनी से आशीर्वाद लेते हुए अलौकिक शक्तियां प्राप्त करेंगी।
source: DivyaHimachal
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