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Tuesday, January 28, 2020

बर्फ साफ… बागीचों में बनाएं तौलिए

बागबानी विशेषज्ञों ने दी सलाह; कहा, गोबर-खाद-दवाई मिलाकर पूरा कर सकते हैं काम, बर्फ  से खत्म हो जाती है अधिकतर बीमारियां

ठियोग –पिछले दिनों हुई बारिश व बर्फबारी से कुछ हद तक किसानों-बागबानों ने राहत की सांस जरूर ली है। इन दिनों ऊपरी शिमला में ठियोग सहित अन्य क्षेत्रों में जहां पर सेब के बागीचों से बर्फ  हट गई है वहां पर पौधों की कांट-छांट का कार्य चल रहा है। जबकि इसके साथ ही लोग सेब के बागीचों में गोबर व खाद भी डाल रहे हैं। इन दिनों बागबानी विशेषज्ञ की मानें तो पौधों की अच्छी नमी मिलने से बागबान अब तोलिएं आदि का कार्य शुरू कर सकते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार पौधों में नमी के बाद बीमारियों के पनपने का खतरा भी कम हो जाता है। बागबानी विषय विशेषज्ञ मदन ठाकुर के अनुसार जमीन में नमी पड़ने के बाद ही सेब के तौलिया करने चाहिए। इससे पौधों को नुकसान कम होता है। उन्होंने बागबानों को सेब के तोलिए बनाने की विधि पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया है कि तोलिए को बनाते समय बागबानों को सबसे पहला ध्यान यह रखना चाहिए कि तोलिए को हमेशा नमी के समय मे ही करना चाहिए क्योंकि इससे एक तो पौधों के तोलिए में जड़ों को कम नुकसान होगा तथा इससे पौधें में बीमारियों के पनपने की संभावना कम रहती है। उन्होंने इसकी विधि पर विस्तार से बताते हुए कहा कि पौधे के तने वाले भाग को बिल्कुल न छेड़ा जाए पौधे के आधे भाग की मिटटी को सख्त रखें और तोलिए करते समय इसे बिल्कुल भी नहीं खोदना चाहिए। उन्होंने बागबानों को सलाह देते हुए है कहा कि इस पर कस्सी कुदाली से खोदने पर जडों में अनावश्यक जख्म हो जाते हैं और इससे विभिन्न रोगों के कीटाणुओं तथा वूलि एफेड का प्रकोप बढ़ने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त इन भागों से कोमल टहनियां निकल आती है जिन पर वूलिऐफेड का सर्वाधिक आक्रमण होता है। तने में किसी तरह का घास न पनपे इससे कई रोग पैदा हो जाते हैं। विशेशज्ञ का मानना है कि तोलिए में यदि खरपतवार उगने से पौधों में कई बीमारियों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है और पौधे का विकास रूक जाता है। पौधे की कलम वाला भाग ग्राफिंटग यूनियन वाला भाग भूमि से ऊपर होना चाहिए और किसी भी सूरत में दबा न हो। इसके दबने से पौधे के सड़ने तथा कालर गलन रोग का भय निरंतर रहता है। बागबानी अधिकारी बताते हैं कि खाद उरर्वक का प्रयोग फलदार पौधों के बाहरी आधे भाग में ही डालकर करना चाहिए तथा तने के समीप से आधे भाग तक या एक से डेढ़ मीटर के घेरे में किसी खाद व उवर्रक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। गोबर की खाद तथा उरर्वक को बाहरी आधे भाग में फैलाकर डालें तथा फिर इसे मिट्टी की पर्त से ढक दें। पौधे के फैलाव के अनुरूप ही तोलिए के बाहरी किनारों पर नाली बनाकर जल निकासी हो सके। उन्होंने बताया कि तोलिए को हर साल बनाना चाहिए इससे हवा के आदान प्रदान के अलावा अतिरिक्त भूमि की परतों में अदला-बदली हो जाती है जिससे जल शोषण शक्ति मिलती है और आवश्यक तत्वों की उपलब्धता पौधों को संभव हो पाती है।

 

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