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Monday, December 30, 2019

शिमला में बहुमंजिला भवन निर्माण की राह आसान नहीं

शिमला –प्लानिंग एरिया शिमला में अढ़ाई मंजिला से अधिक भवन निर्माण पर पिछले दो वर्षों से रोक लगी है। हालांकि शिमला की जनता को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसी कोई संभावनाएं नहीं हैं। नवंबर माह से इस मसले पर हर रोज सुनवाई हो रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीते 15 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखा था, लेकिन राहत नहीं मिल पाई। उसके बाद गत 18 नवंबर से हर दिन इस मसले पर सुनवाई चलती रही।  एनजीटी के उन आदेशों को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दी थी, जिसमें अढ़ाई मंजिला से अधिक भवन निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। बताया गया कि जब तक एनजीटी के आदेश लागू हैं, तब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर काम होना संभव नहीं हैं। ऐसे में जाहिर है कि शिमला के लोग पिछले दो वर्षों से शिमला में बहुमंजिला मकान निर्माण की आस में लगे हैं। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण को बचाने के लिए और आपदा की दृष्टि को देखते हुए 16 जुलाई 2017 यानी पिछले साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजधानी शिमला में भवन निर्माण मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। एनजीटी ने शिमला के कोर और ग्रीन  एरिया में कंस्ट्रकशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है और कोर एरिया के बाहर भी सिर्फ अढ़ाई मंजिला भवन निर्माण हो सकते हैं। दिल्ली में 16 जुलाई 2018 को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने प्रदेश सरकार की रिव्यू पटिशन को खारिज कर अपना फैसला सुनाया था। इसके साथ-साथ कोर और ग्रीन एरिया में अब तक जितने भी अवैध भवन निर्माण हुए हैं उसे तोड़ने के भी आदेश दिए थे। एनजीटी ने प्रदेश के प्लानिंग एरिया में अवैध भवनों को रेगुलर नहीं करने का भी फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि एनजीटी ने 16 नवंबर 2017 को शिमला में भवन निर्माण मामले पर जो फैसला सुनाया था उसी को ही अंतिम फैसला करार दिया। ऐसे में अब शिमला के कोर एरिया में भवन निर्माण नहीं हो सकेंगे और कोर एरिया के बाहर क्षेत्रों में सिर्फ अढ़ाई मंजिला भवनों का ही निर्माण हो सकेंगे। इसके साथ-साथ शिमला कोर एरिया में अवैध तरीके से जो भवन निर्माण हो चुके हैं उन पर जेसीबी चलेगी। यानी ऐसे भवनों को तोड़े जाएंगे। प्रदेश सरकार ने एनजीटी के 16-11-2017 के फैसले को चुनौति देते हुए फरवरी 2018 में रिव्यू पटिशन दायर की थी। जिसके  बाद दो बार 15 मई और 17 जून को एनजीटी के समक्ष भवन मालिकों को राहत देने के लिए अपना पक्ष भी रखा। वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। जब तक अंतिम आदेश सामने नहीं आते, तब तक शिमला में अढ़ाई मंजिल से अधिक मकान निर्माण की राह आसान नहीं होगी। पिछले साल एनजीटी ने प्रदेश के अन्य भागों में हर तरह के अवैध निर्माणों को नियमित करने पर प्रतिबंध लगाते हुए साफ  किया था कि यदि किसी ने शिमला के कोर, ग्रीन व फोरेस्ट एरिया से बाहर अवैध निर्माण को नियमित करने का आवेदन 13 नवंबर 2017 से पहले कर रखा है तो ही वह नियमित हो सकेगा। इसके लिए नियमितकरण शुल्क के साथ पांच हजार प्रति वर्ग फुट और व्यवसायिक भवन के अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 10 हजार प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पर्यावरण मुआवजा देना होगा। यह शुल्क अन्य प्रकार के शुल्क से अलग होगा। प्रदेश में 13 नवंबर 2017 के पश्चात किए किसी भी अनाधिकृत निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पूरे प्रदेश में सड़कों से तीन मीटर की दूरी के भीतर किसी भी प्रकार की निर्माण पर रोक लगा दी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने  35 से 45 डिग्री से ज्यादा की स्लोप में निर्माण करने पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ-साथ प्रदेश में बिना अनुमति के पेड़ों व जमीन की कटिंग करने वाले पर कम से कम पांच लाख का जुर्माना बतौर पर्यावरण नुकसान भरपाई मुआवजा वसूलने के आदेश भी जारी किए गए थे।

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