वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर बोले, लोगों को देना होगा बंदर पकड़ने का प्रशिक्षण, अब सात सौ से बढ़कर एक हजार रुपए करेंगे राशि
शिमला – प्रदेश की 548 पंचायतें बंदरों के लिए अति संवेदनशील हैं और इन पंचायतों में बंदरों का आतंक बरकरार है। शिमला में आयोजित वाइल्ड लाइफ द्वारा आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने यह बात कही। उन्होनें कहा कि इन पंचायतों में भी इस प्रकार की बैठकों का आयोजन किया जाए, ताकि लोगों को बंदर पकड़ने का प्रशिक्षण दिया जा सके। वन मंत्री ने कहा कि बंदर पकड़ने के लिए लोगों को दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी करने का विचार है। हालांकि वर्तमान में यह राशि सात सौ रुपए प्रति बंदर है, लेकिन आने वाले दिनों में एक हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी भी योजना की सफलता के लिए लोगों की भागीदारी आवश्यक है। प्रदेश में वानरों की समस्या के समाधान के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। नगर इकाइयों के माध्यम से इन प्रयासों को लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को बंदरों की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए इस समस्या का कारगर तरीका नसबंदी है। प्रदेश के आठ वानर नसबंदी केंद्रों में वन विभाग अब तक एक लाख 57 हजार वानरों की नसबंदी कर चुका है। वन विभाग बंदरों को पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों को भी उचित प्रशिक्षण देगा। उन्होंने कहा कि बंदर पकड़ने के लिए दी जाने वाली धनराशि बढ़ाकर एक हजार रुपए प्रति बंदर की जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री की स्वच्छता की सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में भी कार्य करने को कहा, क्योंकि इससे काफी हद तक बंदरों की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों में फलदार वृक्ष लगाकर हम बंदरों को जंगलों में ही आहार की सुविधा प्रदान कर सकते हैं और इस प्रकार बंदर जंगलों को छोड़ शहरों की तरफ नहीं आएंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला से मिलने वाले सुझावों पर वन्य प्राणी प्रभाग विचार करेगा, ताकि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए और ठोस कदम उठाए जा सकें।
1100 हॉट स्पॉट
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डा. सविता ने बताया कि मानव व वानर संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग प्रयासरत है। यह कार्यशाला इसी कड़ी में आयोजित की गई। प्रदेश में 1100 वानर हॉट स्पॉट की पहचान की गई है। वन विभाग समय-समय पर गणना के माध्यम से बंदरों की संख्या पर निगरानी रख रहा है। अब बंदरों की संख्या घटकर लगभग दो लाख रह गई है। प्रदेश की 91 तहसीलों, उप-तहसीलों व नगर निगम शिमला में एक वर्ष की अवधि के लिए वर्मिन घोषित किया गया है। साथ ही बंदरों की नसबंदी के लिए आठ नसबंदी केंद्र स्थापित किए गए हैं।
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Courtsey: Divya Himachal
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