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Wednesday, October 31, 2018

पड़ोसियों को देखकर मुआवजा देगी सरकार

 शिमला —फोरलेन से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का चुनावी वादा करने के बाद जयराम सरकार ने अब पड़ोसी राज्यों के मॉडल की तफ्तीश शुरू कर दी है। चुनाव में उनसे वादा किया गया था कि उन्हें फैक्टर दो के तहत मुआवजा देने पर सरकार विचार करेगी, जिसको लेकर फोरलेन प्रभावितों ने दवाब बनाना शुरू कर दिया है।  उनके दवाब के बीच सरकार ने वित्त विभाग को इसका रास्ता निकालने के लिए कहा है। सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग ने पड़ोसी राज्यों का आकलन करना शुरू कर दिया है। इस संबंध में अधिकारियों की विस्तार से चर्चा हुई है जिन्हें कहा गया है कि वे हरियाणा, पंजाब व उत्तराखंड में दिए जा रहे मुआवजे को देखें। इसकी पूरी पड़ताल करने के बाद यह देखें कि हिमाचल में मुआवजा कितना दिया जा रहा है और दूसरे राज्यों में कितना है। इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद फोरलेन प्रभावितों को मुआवजे को लेकर फैसला लिया जाएगा।   बता दें कि पिछले कुछ दिनों से फोरलेन प्रभावित लोग खासा बवाल मचाए हुए हैं। सरकार इसके साथ लगते 20 गांवों को भी नगर नियोजन के नियमों के दायरे में लाई है, जिससे भी हाय तौबा मची हुई है। सुंदरनगर-मनाली फोरलेन के प्रभावित खुलकर सामने आ चुके हैं। इस पर संघर्ष समिति के साथ आला अधिकारियों के स्तर पर वार्ता हुई थी, जिसके बाद वन मंत्री ने भी इनसे बातचीत की। सरकार पर दवाब का ही नतीजा है कि अब सरकार दूसरे राज्यों के मुआवजे की दरों का आकलन करने जा रही है। बताया जाता है कि अभी इस आकलन को लेकर फोरलेन प्रभावितों से बात की जाएगी, जिसके बाद ही सरकार कोई फैसला लेगी। फिलहाल प्रभावितों को फैक्टर एक या फैक्टर दो को लेकर कोई फैसला सरकार ने नहीं लिया है, जिस पर वित्त विभाग की रिपोर्ट के बाद आगे बात होगी। प्रभावितों की मांग है कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण कानून-2013 को मूल भावना के मुताबिक लागू करे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फोरलेन और प्रदेश में प्रस्तावित 70 एनएच के विस्थापित सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं। पूर्व सरकार ने 2015 में शेड्यूल-वन लागू करकेहजारों लोगों की जमीन, मकान और दुकानें अधिग्रहित तो कर लीं, लेकिन एक्ट के मुताबिक न तो लोगों को उचित मुआवजा दिया गया और न ही विस्थापितों का पुनर्वास व पुनर्स्थापना की गई। फैक्टर-वन के तहत लोगों को दोगुना मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि मुंबई हाई कोर्ट फैक्टर-वन को अवैध बता चुका है। नए कानून में भूमि और मकान से उजड़ने वाले किराएदार, दुकानदार और शहरों को भी फिर से बसाने का प्रावधान है, लेकिन प्रदेश में एक भी व्यक्ति का पुनर्वास और पुनर्स्थापना नहीं की गई है। बहरहाल अब वित्त विभाग की रिपोर्ट में ही खुलासा होगा कि हिमाचल में मुआवजा कितना मिल रहा है और दूसरे राज्यों में कितना, इसके आधार पर ही सब तय होगा।

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Courtsey: Divya Himachal
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