हाई कोर्ट ने शिक्षकों को दी राहत, अभी तक केवल जेबीटी-टीजीटी को ही मिलती थी जिम्मेदारी
शिमला, गारली —प्रदेश के सी एंड वी शिक्षक भी अब बीआरसीसी बन पाएंगे। राज्य सरकार ने भी अब इन शिक्षकों को बीआरसीसी के लिए पात्र मान लिया है। प्रदेश में चल रही बीआरसीसी भर्ती को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय ने दो नए आदेश पारित किए हैं। 27 अक्तूबर को गोपाल सिंह व अन्य प्रधान बनाम हिमाचल सरकार मामले में दायर राहत याचिका की सुनवाई करते हुए शिक्षकों को भी बीआरसीसी इंटरव्यू में शामिल होने का अवसर देने की हिदायत दी है। इस याचिका में बीआरसीसी पद हेतु केंद्रीय मुख्य शिक्षक, मुख्य शिक्षक, प्राथमिक सहायक शिक्षक, ग्रामीण विद्या उपासक, ईजीएस ग्रामीण विद्या उपासक, विशेष शिक्षक, विद्या उपासक, नर्सरी प्रशिक्षित शिक्षक, स्वयंसेवी शिक्षकों आदि वर्गों को बीआरसीसी प्राथमिक पद हेतु अवसर देने की गुहार लगाई थी और सी एंड वी वर्ग से भाषा शिक्षक, कला शिक्षक व शास्त्री आदि वर्गों के शिक्षकों ने भी याचिका में स्वयं को बीआरसीसी अपर प्राथमिक पद हेतु पात्र न माने जाने के खिलाफ याचिका दायर कर उनको भी मौका देने की गुहार लगाई थी। इस पर ट्रिब्यूनल से राहत न मिलने पर याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय गए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने इस मामले में प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं के दावे के मुताबिक उनको बीआरसीसी पद हेतु आवेदन का अवसर देने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि नई बीआरसीसी नीति घोषित करने के बाद जल्दबाजी में रही भर्ती में अधिकतर शिक्षकों को आवेदन के लिए पर्याप्त जानकारी व समय नहीं मिला था। अब बीआरसीसी पद के लिए न्यूनतम 50 फीसदी अंकों की छूट भी आरक्षित वर्ग को नहीं दी गई है, जबकि केंद्र द्वारा तय मानकों में पांच वर्ष की जगह यहां सात वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया है। इस तरह अब ट्रिब्यूनल इन मामलों में अग्रिम आदेश देगा, लेकिन नए आदेशों से उन शिक्षकों को आस जगी है, जो अब तक आवेदन की दौड़ से बाहर थे। सी एंड वी शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने भी इस फैसले पर खुशी जताई है।
कोर्ट ने दिया नई नियुक्तियां करने का आदेश
कोर्ट ने सेवारत बीआरसीसी की याचिका शेखर कटोच बनाम सरकार मामले में कार्यरत बीआरसीसी के अधिकारों से पक्षपात किए बिना ही नई नियुक्तियां करने का आदेश 29 अक्तूबर को पारित किया है, जबकि वर्तमान नीति में कूलिंग पीरियड की तीन वर्ष की शर्त लगाकर उनको पुनः आवेदन के अधिकार से ही वंचित किया जा चुका है। हाई कोर्ट ने वर्ष 2008 में हुए निर्णय में साफ किया था कि जब तक एसएसए प्रोजेक्ट पूर्ण नहीं होता, तब तक बीआरसीसी कार्य करते रहेंगे, मगर नई नीतियां उस निर्णय मुताबिक न होने से बीआरसीसी खफा हैं।
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Courtsey: Divya Himachal
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