शिमला— आईपीएच के दो बड़े प्रोजेक्टों को केंद्र सरकार से फंडिंग की मंजूरी के बाद अब प्रदेश सरकार की नजर तीसरे बड़े प्रोजेक्ट पर है। यह परियोजना नदियों व खड्डों के तटीकरण का है जो प्रदेश के लिए बेहद जरूरी है। इस पर भारी भरकम खर्च आएगा जो राज्य सरकार द्वारा खुद वहन करना मुश्किल है, ऐसे में केंद्र में मोदी सरकार जब प्रदेश की मदद कर रही है तो राज्य से एक और परियोजना केंद्र को भेजने की तैयारी है। प्रदेश के सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयारियों में जुटे हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि प्रोजेक्ट 4500 करोड़ का होगा, क्योंकि इस पर काम चल रहा है। माना जा रहा है कि इससे भी अधिक धनराशि प्रदेश सरकार मांग सकती है। हाल ही में वर्षा जल संग्रहण का एक महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है, जो कि 4751 करोड़ रुपए का है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इससे पहले भी एक प्रोजेक्ट केंद्र द्वारा आईपीएच विभाग को मंजूर हो चुका है, जो कि पेयजल योजनाओं से संबंधित है। इससे पुरानी पेयजल योजनाओं का संवर्द्धन किया जाएगा और पूरी तरह से री-मॉडिलिंग होगी। ऐसे में अब विभाग की नजर तीसरे बड़े तटीकरण प्रोजेक्ट पर है, जिसका मसौदा जल्दी ही भेजा जाएगा। इस संबंध में आईपीएच मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने अधिकारियों के साथ चर्चा की है, जिन्हें जल्द से जल्द इसका प्रारूप बनाने को कहा गया है। तटीकरण प्रोजेक्ट वृहद होगा क्योंकि इसमें किसी क्षेत्र विशेष की एक योजना नहीं होगी बल्कि पूरे प्रदेश के लिए ये प्रोजेक्ट होगा। यह प्रोजेक्ट सभी नदियों से संबद्ध होगा, जिसमें रावी, चिनाब, ब्यास नदियों को भी जोड़ा जाएगा। बता दें कि पार्वती व ब्यास नदियों के तटीकरण पर पहले भी केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन पूर्व सरकार के समय में भेजा गया यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका। इसमें केंद्रीय जल संसाधन आयोग ने कुछ तकनीकी आपत्तियां लगा रखी हैं। अब नए सिरे से सभी योजनाओं को प्रोजेक्ट में शामिल कर के भेजने की तैयारी है।
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Courtsey: Divya Himachal
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