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Saturday, February 3, 2018

शिमला में न बढ़ाई जाए गारबेज कलेक्शन फीस

शिमला – शिमला शहर में डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन की फीस न बढ़ाई जाए। फीस बढ़ोत्तरी से शहर की जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह मांग प्रदेश असंगठित कामगार कांग्रेस के अध्यक्ष व पूर्व पार्षद सुरेंद्र चौहान ने उठाई है। सुरेंद्र चौहान  ने मुख्यमंत्री से मांग उठाई है कि गारबेज  फीस में बढ़ोत्तरी न की जाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम के लोगों द्वारा घर-घर जाकर अगले महीने से डोर गारबेज कलेक्शन की फीस बढ़ोत्तरी के बारे में बताया जा रहा है। इसमें घरेलू उपभोक्ता, 50 से 75 रुपये, चाय का ढाबा चलाने वाले से 300 से 600 रुपये इसी तरह कमर्शियल फीस को दो गुना किया जा रहा है। इस महंगाई के दौर में शिमला की जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि इस का खर्चा सरकार वहन करती है तो इसके तीन फायदे होंगे। शहर की जनता पर आर्थिक बोझ नहीं पडे़गा, सैहब सोसायटी जिसे नगर निगम द्वारा घाटे में दिखया जा रहा है उसे भी बचाया जा सकता है क्योंकि इनका मासिक वेतन लोगों द्वारा डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन शुल्क से दिया जाता है और यदि सैहब सोसायटी को सरकार नगर निगम में शामिल मर्ज करे तो इस समस्या का समाधान हो सकता है, क्योंकि नगर निगम में पहले से ही सफाई कर्मचारियों की कमी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से स्थानीय विधायक एंव शिक्षा मंत्री भलीभंति अवगत है, क्योंकि वे भी नगर निगम के सहयोगी सदस्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि नगर निगम की इन समस्याओं को गंभीरता से लें और नगर निगम आयुक्त को इस बारे आवश्यक बैठक बुलाने के निर्देश जारी करें ताकि शिमला शहर की जनता को इस महंगाई के दौर आर्थिक बोझ से निजात दिलाई जा सके क्योंकि शिमला की जनता पहले से ही कई तरह के कर जैसे संपति कर, पानी के बिल में सीवरेज सेस आदि कर देते है।


^पूरी खबर पढ़े: source - DivyaHimachal

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