शिमला – होटल व्यवसायियों ने प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में वृद्धि के प्रस्ताव का खंडन किया है। टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्ज एसोसिएशन शिमला के पदाधिकारियों का कहना है कि शिमला में पहले ही विभिन्न कारणों से होटल व्यवसाय डूबने की कगार पर है। इसके मुख्य कारण अधिक टैक्स का बोझ, आधारभूत ढांचे का अभाव, बिजली तथा पानी क अधिकतम दरें, कर्मचारियों के वेतन का बोझ और ऊपर से पर्यटकों की घटती आवाजाही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र सेठ का कहना है कि नगर निगम पहले ही शिमला के होटल व्यवसायियों से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स व पानी की दरें वसूल रहा है। यही नहीं, निगम ने इसके लिए बकायदा अलग से फैक्टर बनाया है, जिसकी दरों का मापदंड सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि उनकी एसोसिएशन पहले भी इसका विरोध कर चुकी है। उन्होंने चेताया कि निगम को अपना बेस बढ़ाना चाहिए, न कि केवल एकमात्र होटल व्यवसाय, जो कि डूबने की कगार पर है, उस पर और टैक्स का बोझ बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि इस मुद्दे पर जल्द ही मेयर, डिप्टी मेयर व सभी पार्षदों के साथ संयुक्त बैठक करेगा। कारोबारियों का यहां तक कहना है कि इस बार बन रहे सूखे के हालात के कारण सैलानी यहां से मुंह मोड़ने लगे हैं। ऐसे में होटल कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट आन खड़ा हो गया है। अब नगर निगम का यह फैसला हमें कतई मंजूर नहीं है।
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