सुन्नी — सुन्नी में उपमंडलाधिकारी कार्यालय खोलने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। सुन्नी में पिछले लंबे अरसे से क्षेत्रवासियों की उपमंडलाधिकारी कार्यालय के संचालन की मांग चल रही है, जो अब चरम पर पहुंच चुकी है। कोई भी सरकार हो लोगों की उक्त मांग प्रमुखता से रहती है। अब तक किसी भी सरकार ने लोगों कि मांग पर गौर नहीं फरमाया है। पांच वर्षों के इस कार्यकाल में क्षेत्रवासियों को आस थी कि उनकी यह मांग अवश्य पूरी होगी। मुख्यमंत्री ने पांच वर्ष पूर्व ही शिमला ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव लड़ा और भारी बहुमतों से जीत कर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करके प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पांच वर्षों के दौरान सुन्नीवासियों की उपमंडलाधिकारी कार्यलय खोलने की मांग सर्वोपरि रही है। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इन पांच वर्षों में अपेक्षा से अधिक विकास किया है। लंबे अरसे से चलने वाली उक्त मांग यदि पूरी नहीं होती तो क्षेत्र में हुए विकास के मायने शून्य होंगे। चुनाव की अंतिम बेला में क्षेत्रवासियों को आस है कि मुख्यमंत्री उनकी यह मांग पूरी करेंगे। शिमला ग्रामीण की एकमात्र नगर पंचायत होने के साथ सुन्नी रियासती काल में भज्जी रियासत का मुख्यालय भी रही है। आजादी के बाद भी उक्त क्षेत्र काफी वर्षों तक अपेक्षित ही रहा। काफी अरसे तक यह उपतहसील के तौर पर ही संचालित होती रही। बड़ी जदोजहद से यहां तहसील संचालित हो सकी। प्रदेश में अधिकांश समय में कांग्रेस का शासन काल होने के कारण तहसील का दर्जा दिए जाने का श्रेय कांग्रेस को जाना लाजमी है। तहसील सुन्नी के तहत दर्जनों पंचायतों के बाशिंदों को उपमंडलाधिकारी कार्यालय संबंधित कार्यों के लिए शिमला ही पंहुचना पड़ता है। इसी सिलसिले में हाल ही में क्षेत्र से लगभग 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री वीरभद्र से शिमला में मिला। व्यापार मंडल सुन्नी की अगवाई में सभी दलों, व्यापारियों, महिलामंडल, युवक मंडलों तथा अन्य जनसंगठनों के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से उपमंडलाधिकारी कार्यालय खोलने की अपील की। व्यापार मंडल के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने लोगों की मांग को ध्यानपूर्वक सुना तथा पूरा करने का आश्वासन दिया।
^पूरी खबर पढ़े: source - DivyaHimachal
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