शिमला — शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में गुरुवार को राष्ट्रपिता के आध्यात्मिक मार्ग दर्शन श्रीमद राजचंद्र को नाट्यांजलि देते हुए युगपुरूष-महात्मा के महात्मा नाटक का मंचन किया गया। श्रीमद् राजचंद्रा मिशन धर्मपुर द्वारा इस नाटक की प्रस्तुति गेयटी में दी गई। नाटम में दर्शाया गया कि महात्मा गांधी ने भारत तथा विश्व को सत्य और अहिंसा के सनातन सिद्धांत प्रदान किए है, लेकिन बारिस्टर मोहनदास ने इन सिद्धांतों को प्रस्थापित करने वाले उनके चरित्र का गठन करने वाले उनके अध्यात्मिक मार्ग दर्शन श्रीमद् राजचंद्र जी थे। इस नाटक में मोहनदास को महात्मा में रूपांतरित करने की यशोगाथा को नाटक के माध्यम से दर्शाया गया है। वर्तमान समय में भौतिक सुखों के पीछे दौड़ रहे मनुष्य को यह नाटक विचार करने के लिए प्रेरित करता है कि जीवन का ध्येय क्या होना चाहिए? मानवता, सत्य, अहिंसा, विविधता का सम्मान जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाकर जीवन को आंतरिक रूप से स्मृद्ध बनाया जा सकता है और एक प्रेममय, शांतिपूर्ण और मैत्रीभाव से भरपुर निर्भय समाज का निर्माण हो ऐसा नाटक में दर्शाया गया है। अल्पा गांधी ने बताया कि यह नाटक राजेश जोशी द्वारा निर्देशित और उत्तम गडा द्वारा लिखित है, जबकि इसका संगीत सचिन जीगर की जोड़ी ने किया है। इस नाटक को तीन पुरस्कार भी मिल चुके है। नाटक हिंदी कन्नड़ और मराठी में प्रस्तुत हो चुका है, जबकि अंग्रेजी, तमिल और बंगाली भाषाओं में तैयार हो रहा है। देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी प्रस्तुति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि नाटक से जितनी भी राशि एकत्रित होगी उसे दक्षिण-गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में 200 बेड के आधुनिक अस्पताल के निर्माण में दिया जाएगा।
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