शिमला — स्वदेशी जागरण मंच शिमला ने 11 मई 1998 को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से किए गए परमाणु विस्फोट को याद करते हुए चीनी माल का बहिष्कार करने के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन स्वदेशी जागरण मंच शिमला विभाग संपर्क प्रमुख डा. सुशांत देष्टा और नगर कार्यवाह हरनाम की अगवाई में सौंपा गया। डा. सुशांत देष्टा ने बताया कि इस ज्ञापन के द्वारा चीनी उत्पाद को देश से पूरी तरह बहिष्कृत करने के लिए नीति निर्माण की आवश्यकता के लिए ही यह ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने बताया कि आज देश में चीन से भारतीय सीमाओं पर तनातनी का दौर चल रहा है। उन्होंने बताया कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। इसके साथ ही देश में बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताते हुए देष्टा बताया कि हमारा चीन से व्यापारिक घाटा 2016-17 में लगभग दो अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान के तहत पूरे देश भर मंे एक करोड़ से अधिक लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं, वहीं शिमला जिला में ही लगभग 15 हजार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर करके चीन के प्रति नाराजगी प्रकट की है। डा. देष्टा ने सरकार से कठोर नीति निर्माण करने की बात की। इस अवसर पर जिला विचार मंडल प्रमुख सुबोध कड़शोली, जिला संगठन मंत्री अतुल शर्मा, हनीश चोपड़ा और चंद्रेश्वर सहित स्वदेशी जागरण मंच के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह है स्वदेशी जागरण मंच की मुख्य मांगें
मंच ने मांग की है कि चीनी माल में मिले जहरीले रसायनों एवं घटिया गुणवता वाली वस्तुओं के लिए मानक तय किए जाएं, जिससे भारत में चीन का घटिया सामान न बिक पाए। चीन से आरसेप सहित किसी भी प्रकार का नया समझौता न किया जाए। चीनी कंपनियां बड़ी संख्या में सामरिक दृष्टि से संवेदनशील एवं महत्त्वपूर्ण ठिकानों, जैसे उतर पूर्व के राज्यों, सीमा क्षेत्र आदि के ठेके लेकर अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। चीनी कंपनियों को भारत में निविदा डालने के लिए प्रतिबंधित किया जाए।
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