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Tuesday, January 17, 2017

अब तो जीने की आस ही छोड़ दी …

रोहड़ू- चड़गांव तहसील के तांगणू में बौनवाड़ी गांव में आग का तांडव क्या हुआ यहां के लोगों की अब जीने की आस भी मानों खत्म हो गई है। इस त्रासदी में बिलकुल उजड़ चुके कुछ लोग इतने टूट चुके हैं, उन्हें जैसे अब जीने की आस ही नहीं रही। संतोष कुमार जिनके घर से आग लगी है, वे तो जैसे टूट ही गए हैं। उनके आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि गांव को नुकसान तो हुआ ही और वे भी सब कुछ खो चुके हैं।  उनके बेटों के पास कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने सर्दी के लिए अपने पास 35 बकरें भी पाल रखे थे, जिससे अच्छी आमद भी आनी थी, जो जल गए हैं। अपने तन पर पहने कपड़ों के सिवाय कुछ भी नहीं बचा पाए हैं। प्रेम पाल का कहना है कि जब आग लगी, तो वे सो चुके थे और घर के सभी सदस्य भी सो चुके थे, तभी लोगों के चीखने की आवाजें आईं तो वह बाहर दौड़े, तो आग का खौफनाक मंजर देख उनके पैरों से जैसे जमीन खिसक गई। घर के सदस्यों को उठाया और बाहर भागे। राजपाल का कहना है कि उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उनका सब कुछ आग की भेंट चड़ गया है।  सरदार सिंह का कहना है कि इस बार उनके अनाज की अच्छी फसल हुई और काफी खुश थे।

 


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source: DivyaHimachal

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