नाहन — प्रदेश की भाग्यरेखाएं कही जाने वाली सड़कें अब मानव खून की प्यासी हो गई हैं। प्रदेश की इन सर्पीली सड़कों पर प्रतिदिन जहां सात सड़क हादसे हो रहे हैं, वहीं यदि इन सड़क दुर्घटनाओं में घायल व मृतकों का आकलन किया जाए तो प्रतिदिन 16 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2014 के पांच महीनों में प्रदेश में 1141 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें जहां 2043 लोग जख्मी हुए हैं, वहीं 441 लोग बेमौत मारे गए हैं। यदि गत दस वर्षों का आकलन करें तो गत दस वर्षों में प्रदेश में 30,299 सड़क दुर्घटनाएं घटी हैं। इनमें सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं वर्ष 2011 में 3099 हुई हैं, जिसमें 1353 लोग मौत के मुंह में समाए हैं, जबकि 5462 लोग इन सड़क हादसों में घायल हुए हैं। गत दस वर्षों में सबसे कम सड़क दुर्घटनाएं 2006 में दर्ज की गई हैं। वर्ष 2006 में प्रदेश में 2727 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। यदि सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की बात करें तो वर्ष 2005 में सबसे कम 812 लोग बेमौत मारे गए, जबकि 4507 लोग घायल हुए थे। जानकार बताते हैं कि प्रदेश में आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण प्रदेश की खस्ताहाल सर्पीली सड़कें हैं। राज्य में इतने अधिक हादसे होने के बावजूद न तो प्रदेश सरकार और न ही लोक निर्माण विभाग कुछ कर पाया है। सड़क दुर्घटनाओं की बात करें तो वर्ष 2014 के पांच महीनों में कुल 1141 सड़क हादसे हुए हैं।
from Divya Himachal
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