शिमला — हिमाचल में एमसीआई के बाद अब डीसीआई (डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया) सरकारी डेंटल कालेज पर गाज गिराएगी। वर्ष 2015 में पीजी की बढ़ी सीटों का कोर्स पूरा होने वाला है, मगर पिछले दो वर्षों से आपत्तियां लगाई थीं उसकी ओर अब तक कालेज प्रशासन ने कोई रुझान नहीं दिखाया है। ऐसे में पीजी की डिग्री पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि कालेज के कुछ विभागों पर डीसीआई ने आपत्ति लगाई है कि यहां पर फैकल्टी, लैब, इक्विपमेंट और लाइबे्ररी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यदि समय रहते इसे पूरा नहीं करते हैं तो छात्रों को दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं। प्रदेश में सरकारी डेंटल कालेज में डीसीआई हर वर्ष आपत्तियां लगाती है, मगर कालेज प्रशासन इसे लेकर अभी तक गंभीर नहीं है। पीजी के छात्रों के लिए लैब अनिवार्य होती है, जिसका डीसीआई ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है, मगर कालेज में कराउन लैब पिछले 15 वर्ष से बंद है। ऐसे में पीजी के छात्रों को पिछले कई वर्षों में लैब की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अक्तूबर में डीसीआई का अंतिम दौरा होगा। उधर, मेडिकल शिक्षा विभाग के निदेशक जयश्री शर्मा ने बताया कि डीसीआई ने जो आपत्तियां लगाई हैं उन्हें लेकर विभाग गंभीर है। आपत्तियों को जल्द ही दूर किया जाएगा।
from Divya Himachal
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