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Friday, April 11, 2014

बांध की भेंट चढ़ेगी 2950 हेक्टेयर भूमि


newsशिलाई —हिमाचल व उत्तराखंड की सरहद पर टौंस नदी पर मोहराड़ में प्रस्तावित 660 मेगावाट की किसाउ बांध बहु-उद्देश्यीय परियोजना में यहां के किसानों की 2950 हेक्टेयर भूमि इस बांध की भेंट चढ़ेगी। इस परियोजना में हिमाचल के आठ व उत्तराखंड के नौ राजस्व गांव एवं दर्जनों उप गांव बांध की जद में आ रहे हैं। मोहराड़ से त्यूनी तक लगभग 32 किलोमीटर लंबी झील इस बांध से बनेगी। इस बांध में वन भूमि, कृषि, सरकारी व आरक्षित वन भूमि शामिल है। इस बांध में ज्यादा भूमि हिमाचल की आ रही है। हालांकि चिन्हित की गई भूमि से वास्तविक आंकड़ा ज्यादा होगा, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन का ज्यादा खतरा रहता है, इसलिए बांध के निर्माण हेतु ज्यादा भूमि अधिग्रहण करनी पड़ेगी। प्रस्तावित 660 मेगावाट की किसाउ बांध बहु-उद्देश्यीय परियोजना का बनना लगभग तय है। दोनों प्रदेशों के ऊर्जा सचिव व मुख्यमंत्रियों में कई बार वार्ता भी हो चुकी है तथा मात्र चंद औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं। टौंस नदी पर मोहराड़ में प्रस्तावित किसाउ बांध में 2950 हेक्टेयर भूमि में से 1498 हेक्टेयर भूमि हिमाचल की है। विभागीय रिकार्ड के मुताबिक 400 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि है, जबकि 177 हेक्टेयर भूमि किसानों की निजी है। इसके अतिरिक्त 921 हेक्टेयर भूमि मकबूजा मालकिन हिमाचल सरकार व प्रदेश वन विभाग की है। नदी की दूसरी ओर उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर चिन्हित भूमि में 289 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि 335 हेक्टेयर कृषि तथा 828 हेक्टेयर भूमि प्रदेश सरकार की है। यूजेवीएन देहरादून के अनुसार हिमाचल के आठ व उत्तराखंड के नौ गांव तथा दर्जनों उप गांव इस बांध बनने से विस्थापित होंगे। यूजेवीएन परियोजना देहरादून के महाप्रबंधक अजय पटेल ने लिखित जानकारी में बताया कि यह आंकड़ा परियोजना के अनुसार है। कार्यस्थल पर अभी भौतिक सत्यापन किया जाना बाकी है।







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