हमीरपुर — प्रदेश की सबसे बड़ी आर्मी कैंटीन से वार विडो के शराब कोटे को कौन गटक रहा है। कैंटीन से हर माह वार विडो के नाम से जारी दो हजार बोतल के कोटे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है। इस कैंटीन से हा महीने छह से आठ हजार शराब बोतलों का कोटा फौजियों की विधवाओं के नाम से जारी हो रहा है। दर्ज रिकार्ड के अनुसार आफिसर की वार विडो को पांच बोतल तथा जूनियर कमीशन आफिसर की विधवाओं को तीन बोतल शराब जारी की जा रही है। सिपाही से लेकर हवलदार की विधवाओं को दो बोतल मिल रही है। हमीरपुर जिला में कुल दो हजार वार विडो उक्त कैंटीन की कार्ड होल्डर हैं और नियमों के अनुसार इन्हें केटागरी वाइज वाइन मिलती है। सूत्रों का कहना है कि इन वार विडो को प्रति कार्ड औसतन तीन से चार यूनिट (बोतल) शराब दी जा रही है, लेकिन तय मात्रा से ज्यादा कोटा चौंकाने वाली बात है। इसी कारण कैंटीन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है और यह सवाल उठ रहे हैं कि वार विडो के इस कोटे को कौन गटक रहा है। कैंटीन प्रबंधन की दलील है कि हमीरपुर जिला की सभी वार विडो अपना पूरा कोटा लेती हैं। कोटा लेने के बाद वे इस शराब का कैसा प्रयोग करते हैं, यह उनका निजी मामला है। इसमें कैंटीन प्रबंधन हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इस कैंटीन के तहत हमीरपुर जिला के 21 हजार फौजी, पूर्व सैनिक तथा वार विडो कार्ड होल्डर हैं। इन सभी कार्ड होल्डर को हर माह एक लाख यूनिट (बोतल) शराब जारी होती है। इनमें फौजी अफसरों को प्रतिमाह दस बोतल, नायब सूबेदार से मेजर सूबेदार तक छह बोतल तथा सिपाही से हवलदार तक चार बोतलें शराब की जारी हो रही हैं। हालांकि फौजियों व वार विडो को ये कोटा निर्धारित मापदंडों के तहत दिया जाता है।
from Divya Himachal
No comments:
Post a Comment