रोहड़ू — इन दिनों सेब पौधों पर पिंक बड स्टेज शुरू हो गई है। बागबानों ने सेब के पौधों में दवाइयों के छिड़काव करने की तैयारी कर ली है। आम तौर से देखा गया है कि बागबान सेब पौधों की पिंक बड स्टेज में सही दवाइयों के मिश्रण का छिड़काव नहीं करते हैं और परिणाम यह होता है कि सेब पौधों के रोगों का उचित नियंत्रण नहीं होता है, वहीं इससे फसल के भी नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। बागबानी विशेषज्ञों के अनुसार सेब की फसल क्रिया में सबसे महत्त्वपूर्ण है, जो दवाइयों के उचित मिश्रण पर निर्भर करती है। बागबानी विशेषज्ञों ने पिंक बड स्टेज में बोरिक एसिड का छिड़काव करने की सलाह दी है। बोरिक एसिड का छिड़काव पौधों में बोरोन की कमी को पूरा करता है। बोरोन सेब पौधों में परागण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में सहायक व आवश्यक तत्त्व है। यूरिया का छिड़काव उचित ढंग से होगा। नाइट्रोजन मिलने से पौधों पर पिंक बड स्टेज के बाद जो फूल खिलेंगे वे चमकीले होने पर अधिक आकर्षक होंगे और मधुमक्खियों के अकर्षित होने पर सेब फूलों में परागण क्रिया तेजी से होगी। सेब फलों में कोट राट रोग की समस्या भी आम हो गई है। इसमें सेब का फल बाहर से चमकीला और लाल होता है, लेकिन अंदर से खोखला हो जाता है। पिंक बड स्टेज में यदि बोरिन एसिड के साथ मिलाकर इंडोफिल या कंपेनियन मेंकाजैब का छिड़काव किया जाए तो कोट राट पर नियंत्रण किया जा सकता है। बागबानी विशेषज्ञ एसपी भारद्वाज ने बताया कि बोरिन एसिड 200 ग्राम, यूरिया एक किलो इंडोफिल 600 ग्राम, कंपेनियन 500 ग्राम, स्कोर 30 एमएल को 200 लीटर पानी में छिड़काव करें।
source: DivyaHimachal
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