शिमला-शिमला स्थित प्रदेश के एकमात्र राजकीय कन्या महाविद्यालय की रूसा बजट के लिए राह आसान हो गई है। पंद्रह साल से भी पहले अपने असली नाम की जंग लड़ रहे कालेज को अपना अंतिम नाम मिल गया है। यानी कालेज का जो नाम है, वह कई वर्षों बाद विवि अनुदान आयोग व शिक्षा विभाग की फाइलों में लिखित में दर्ज हो चुका है। आरकेएमवी के लिए यह अच्छी खबर है। अब कालेज में पढ़ रही तीन हजार से ज्यादा छात्राओं के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा भी दूर हो गया है। बता दें कि आरकेएमवी का नाम असल में क्या था, कालेज प्रशासन को इस बारे में जानकारी ही नहीं थी। दरअसल कई वर्ष पहले किसी प्रधानाचार्य ने कालेज का नाम बीच में बदलकर कुछ और रख दिया और उस नाम को यूजीसी में दर्ज करवा दिया। वहीं उसके कुछ समय बाद फिर से एक और पिं्रसीपल ने कालेज का नाम बदल दिया, लेकिन यूजीसी में इस नाम को दर्ज नहीं करवाया। हैरानी की बात है कि कालेज के पास अपने पुराने रिकॉर्ड भी गुम हो गए थे। आखिर कालेज का असली नाम क्या है, वहीं यूजीसी में किस नाम से इस कालेज का नाम दर्ज है, इस बारे में कोई भी जानकारी वर्तमान प्रधानाचार्य सहित प्रशासन को नहीं थी। हालांकि आरकेएमवी प्रशासन ने यूजीसी में जाकर भी अपने असली नाम के लिए दस्तावेज खंगाले। बावूजद इसके कालेज को अपना नाम नहीं मिला। यही वजह रही कि अंत में कालेज प्रशासन ने वर्तमान के आरकेएमवी को ही यूजीसी में दर्ज करवा दिया। अब इस कालेज को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में आरकेएमवी के नाम से ही पहचान मिली है। गौर हो कि कालेज का असली नाम गुमनाम होने की वजह से कालेज वर्ष 2005 के बाद नैक दौरा भी नहीं करवा पा रहा था। कारण यह कि कालेज को जब तक अपना असली नाम पता नहीं होता, तब तक कालेज नैक को अप्लाई भी नहीं कर सकता था। हालांकि बावजूद इसके कालेज प्रशासन ने कई बार नैक को अप्लाई करने के लिए आवेदन किया।
दिव्य हिमाचल ने उठाया था मामला
बता दें कि आरकेएमवी का नाम हुआ गुमनाम, इस मामले को कई बार दिव्य हिमाचल ने उठाया था। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य बिना बजट के कैसे सुधरेगा, यह सवाल भी उठाया गया। उसके बाद ही कॉलेज प्रशासन हरकत में आया, और उन्होंने युजीसी में कॉलेज का असली नाम लिखित में दर्ज करवाया।
रूसा बजट लेने में सबसे पीछे
बता दें कि शिमला का आरकएमवी कॉलेज रूसा बजट लेने में भी सबसे पीछे है। अभी तक कॉलेज को रूसा फेज वन की भी पूरी ग्रांट नहीं मिल पाई है। जबकि इस कॉलेज में साढ़े तीन हजार छात्र पढ़ाई कर रहे है। ऐसे में बजट की कमी से जूझ रहे इस कॉलेज को नैक से दौरा करवाकर बेहतर ग्रेड लेना जरूरी है।
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