2013 के बाद सालाना दर्ज मामलों की संख्या 250 से ज्यादा, 2018 में रेप के 345 केस
पालमपुर-दिल्ली का निर्भया कांड, प्रदेश का गुडि़या मामला और अब हैदराबाद की पशु चिकित्सक की घटना ने देश व प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पैदा किए हैं। निर्भया मामले के दोषी अभी फांसी से दूर हैं, हैदराबाद की घटना को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं तो प्रदेश के गुडि़या मामले में अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। साल-दर-साल ऐसे मामलों में इजाफा हो रहा है। 2013 के बाद से सालाना दर्ज किए जा रहे रेप के मामलों का आंकड़ा 250 से अधिक रहा है तो अब दो वर्षों से ग्राफ 300 की संख्या को पार कर गया है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2010 में दुष्कर्म के 160, 2011 में 168 और 2012 में 183 मामले दर्ज हुए। 2013 में इन मामलों में चिंताजनक इजाफा हुआ और आंकड़ा 250 पर जा पहुंचा, यानी हर माह थानों तक पहुंचने वाले रेप के मामलों का औसत ग्राफ 20 से ज्यादा हो गया है। इसके बाद 2014 में 284, 2015 में 244, 2016 में 253 और 2017 में रेप के 248 मामले दर्ज हुए। 2018 में दुष्कर्म के मामलों की संख्या पहली बार तीन सौ को पार कर गई और प्रदेश में रेप के 345 मामले दर्ज हुए। यानी हर दिन औसतन दुष्कर्म का एक मामला सामने आया। इस वर्ष भी यह ग्राफ तीन सौ के पार है और अक्तूबर तक ही संख्या 297 तक पहुंच चुकी है। रेप के यह आंकड़े तो उन मामलों के हैं, जिनकी शिकायत थानों में दर्ज हुई है। जानकारों के अनुसार ऐसे भी बहुत से मामले हैं, जो विभिन्न कारणों से सामने ही नहीं आ पाते।
गुडि़या मामले की सच्चाई सामने आए
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार कहते हैं कि गुडि़या मामला प्रदेश के माथे पर कलंक है। इस मामले की सारी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। शांता कुमार कहते हैं कि ऐसा मामला देश के इतिहास में पहली बार सामने आया है जब डीआईजी स्तर तक के अधिकारियों को पकड़ा गया, लेकिन आरोपी कौन है, यह अब तक साफ नहीं हो पाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अनुभवी अधिकारियों की मदद लेकर इस मामले का जल्द से जल्द पूरा खुलासा किया जाए।
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Courtsey: Divya Himachal
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