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Thursday, December 5, 2019

गाजर

गाजर को खाद्य वस्तुओं की रानी माना जाता है । गाजर के रस
को जीवन-रस कहा जा रहा है । गाजर में कैरोटीन [ विटामिन 'ए'
का पीला अंश] अधिक पाया जाता है । शाक-सब्जियों में गाजर का
स्थान पौष्टिकता की दृष्टि से बहुत ऊँचा है ।
भारत के सभी प्रान्तों में गाजर की खेती होती है-पहाड़ो
इलाकों में भी और मैदानी क्षेत्रों में भी । देहाती लोग अन्न न मिलने
या कम होने पर गाजर से हो नाश्ता करते और गाजर से ही पेट
भर लेते हैं । मनुष्य-शरीर को पुष्ट करनेवाले सारे तत्त्व इसमें मौजूद
रक्त खून] की कमी को दूर करने के लिए यह परम औषध है ।
इसमें लोहे की मात्रा बहुत प्रधिक है और यह तुरन्त पचकर रक्त में
जा मिलती है ।

इंग्लेंड में राज्य की ओर से देशवासियों को आदेश है कि वे गाजर का अधिक-से-अघिक प्रयोग करें । अंडे तथा मांस से प्रधिक
ताकत देनेवाला अंश गाजर में विद्यमान है । इंग्लैंड के रेलवे- स्टेशनों
के सटालों पर तथा लंदन के रेस्तरा में गाजर ने दूध का तथा दुग्ध
मे निमित पदार्थों का स्थान ले लिया है ।
मधुमेह [डायबिटीज] दमा चिड़चिड़ापन, बेरीबेरी, स्नायु-
दुर्बलता [पुट्ठों की कमजोरी), कब्ज, पेट में केंचुओ का पड़ना,
जबड़ों-होंठों-मुंह मे छाले पड़ना, स्त्रियों के स्तनों में दूध की कमी
होना, विटामिन 'सी' की कमी से होनेवाले रोगों आदि में गाजर
बहुत ही लाभदायक है ।
विटामिन 'ए' भी गाजर में पर्याप्त है; अत: कच्ची, उबालकर,
भूनकर, सब्जी बनाकर, मुरब्बा बनाकर या रस निकालकर- जैसे
भी हो गाजर का प्रयोग कीजिए । आँखों के लिए गाजर बढ़िया
'टॉनिक' है । विटामिन 'ए' की कमी से ही नेत्र रोग होते हैं और
दृष्टि-शक्ति कमजोर होती है । गाजर के प्रयोग से वह कमी दूर हो
जाती है । दूसरे विश्वयुद्धं में वायुयान-चालकों को गाजर रस पीने
के लिए विवश किया जाता था, ताकि अधिक ऊँचाई पर, रात्रि में
तथा धुन्ध और बादलों में भी उनकी दृष्टि ठीक-ठीक काम करती
रहे । जैसे झाड़ू कमरे को साफ़ करती है, वैसे ही गाजर कोष्ठ
[अन्तड़ियों तथा मलाशय] को साफ़़ करती है ।
देसी या कंपोस्ट खादवाले खेत में उपजी गाजर अधिक गुण-
कारी होती है । रासायनिक खादोंवाले खेत में उपजी गाजर सुंदर
होने पर भी कम उपयोगी होती है ।

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