शिमला –राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने किसानों से प्रदेश सरकार की प्राकृतिक ‘खेती, खुशहाल किसान’ योजना का लाभ उठाकर हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष, 2022 तक हिमाचल पूरी तरह से प्राकृतिक कृषक राज्य बन जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय नस्ल की गाय प्राकृतिक खेती का एक मुख्य घटक है, इसलिए किसानों को गाय की खरीद के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। राज्यपाल शिमला के साथ लगते राज्य कृषि प्रबंधन और विस्तार प्रशिक्षण संस्थान मशोबरा में ‘प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ योजना पर उत्तम किसान सम्मेलन और कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। इस कार्यशाला में सात जिलों के 32 विकास खंडों के लगभग 250 किसानों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र की हिमाचल की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका है, जो प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 5.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि की जा रही है। सरकार द्वारा आरंभ की गई प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना बेहतर परिणाम दे रही है। इस योजना के अंतर्गत इस वित्त वर्ष में 50 हजार किसानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 42 हजार किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में किसान इस योजना को अपना रहे हैं। श्री दत्तात्रेय ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 के लिए 19.03 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस अवधि के दौरान 1600 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती योजना को प्रदेश में दो वर्ष पूर्व आरंभ किया गया था और आज इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन जाएगा।
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Courtsey: Divya Himachal
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