शिमला – प्रदेश सरकार फर्स्ट रैफरल यूनिट (एफआरयू) में बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं देने का दम भरती है लेकिन असलियत कुछ और ही है। जहां पीएचसी व अन्य दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में डाक्टरों व अन्य श्रेणियों के पद खाली चल रहे हैं वहीं एफआरयू में भी इनकी रिक्तियां लोगों को भारी पड़ रही हैं। शिमला जिला के कोटखाई फर्स्ट रैफरल यूनिट की ही बात करें तो यहां पर स्वीकृत पदों में से आधे पद खाली पड़े हुए हैं। यहां तक की उपकरण चलाने के लिए तकनीशियन भी नहीं जिस कारण लोगों को निजी अस्पतालों में खर्चा करना पड़ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटखाई जिसे एफआरयू बनाया गया है, में चिकित्सकों के साथ दूसरी श्रेणियों के 46 कुल पद स्वीकृत हैं जिसमें से 23 पद खाली पड़े हुए हैं और 23 पद भरे हैं। इस एफआरयू में खंड चिकित्सा अधिकारी का एक पद स्वीकृत है और वहीं खाली पड़ा हुआ है। इसके साथ चिकित्सा अधिकारी के पांच पद स्वीकृत हैं जिसमें से तीन भरे हैं और दो पद खाली पड़े हैं। दंत चिकित्सक का एक पद स्वीकृत है जो भी खाली पड़ा हुआ है। कार्यालय अधीक्षक के एक स्वीकृत पद को भरा गया है जबकि वरिष्ठ सहायकों व मुख्य औषधक का भी एक-एक पद भरा हुआ है। नर्सों के चार में से तीन पद भरे हुए हैं एक खाली है। स्वास्थ्य शिक्षक का एक पद स्वीकृत है जोकि खाली पड़ा है वहीं ऑफथालमिक ऑफिसर का भी एक स्वीकृत पद खाली है। इसी तरह से पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षक का एक स्वीकृत पद भरा हुआ है जबकि महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के दो में से एक ही पद भरा है। रेडियोग्राफर का एक स्वीकृत पद भरा हुआ है वहीं दाई के चार में से तीन पद भरे हैं। एलएनएमए का एक स्वीकृत पद है वह भी खाली चल रहा है वहीं डीएसएन का पद भी खाली है। कुक, ड्राइवर, चतुर्थ श्रेणी व सफाई कर्मियों के भी पद यहां खाली हैं जोकि स्वीकृत पदों के अनुरूप नहीं है। शिमला जिला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसी ही हालत है जहां की कई पीएचसी खाली पड़ी हुई हैं।
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