शिमला – शिमला में एक मृतक कर्मचारी की पेंशन लेने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा ही निकला। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि मृतक का बेटा ही फर्जी कागजात लेकर पेंशन ले रहा था। ऐसे में पुलिस अब बेटे पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। राजभवन शिमला से सेवानिवृत्त कर्मचारी जगन्नाथ के निधन के बाद भी उसकी पेंशन ली जाती रही। बताया जा रहा है कि पेंशनधारक जगन्नाथ की पत्नी की मौत हो चुकी थी, ऐसे में उसकी मौत के बाद पेंशन की सुविधा बंद होनी थी। लेकिन इसके लिए मृतक कर्मचारी के झूठे आजीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए और पेंशन ली जाती रही। वहीं ट्रेजरी में तैनात अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह मामला बीते 8 जनवरी को सामने आया और जिला ट्रेजरी अधिकारी ने इसकी पुलिस में शिकायत थी। इस पर सदर थाने में पुलिस ने धोखाखड़ी का मामला दर्ज किया। पुलिस को शुरू से ही यह शक था कि मृतक की पेंशन को कोई उसका करीबी ही ले सकता है। पुलिस ने इस बारे में बैंक से रिकार्ड लिया था और मृतक के बेटे को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इसके बाद जांच में पता चला कि पेंशन लेने वाला उसका बेटा ही है। ऐसे में पुलिस मृतक कर्मचारी के बेटे के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। वहीं झूठे प्रमाणपत्रों के आधार पर 4.76 लाख रुपए हड़पने के मामले में अब ट्रेजरी विभाग ने भी रिकवरी की तैयारी शुरु कर दी है। उल्लेखनीय है कि चंबा निवासी जगन्नाथ से राजभवन से सेवानिवृत्त हुए था और इसके बाद 20 अप्रैल 2014 को उसकी मौत भी हो गई थी। लेकिन इसके बावजूद भी पेंशन ली जाती रही। बताया जा रहा है कि बीते सात दिसंबर 2017 को जब एक व्यक्ति जगन्नाथ का आजीवन प्रमाण पत्र देने पहुंचा तो ट्रेजरी अधिकारियों ने इसके लिए आधार कार्ड मांगा। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति आधार कार्ड की कापी लाने की बात कहकर बाहर निकला था, लेकिन न तो शाम को और नहीं दूसरे दिन वापस पहुंचा। इस पर कर्मचारियों को संदेह हुआ और इसकी पुलिस में शिकायत दी। बहरहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और वहीं राजस्व विभाग भी सरकारी पैसे की रिकवरी की तैयारी में जुट गया है।
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